<no title> राजनाथ सिंह सूर्य ने 2 से 300 सांसद पहुंचाए दिल्ली में
June 16, 2019 • UPMA SHUKLA

परसों स्वर्गवासी हुए राजनाथ सिंह सूर्य ने अपने साहस के बल पर और अपनी कलम की ताकत पर दो सांसदों से 300 सांसदों की ताकत दिल्ली में पहुंचाई आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा स्वर्गीय राजनाथ सूर्य 1989 90 में स्वतंत्र भारत अखबार के संपादक हुए मैं उनका अधीनस्थ कर्मचारी था राजनाथ सिंह सूर्य के परिवारजनों ने ही आजादी के बाद राम जन्मभूमि का ताला खोले जाने का मुकदमा फैजाबाद में दायर किया था जब वे अचानक स्वतंत्र भारत अखबार के संपादक हुए संथा 1989 और 90 का राज्य था मुलायम सिंह का उन्होंने एक जंग छेड़ दी मुलायम सिंह के खिलाफ निडरता के साथ उन्होंने स्वतंत्र भारत में एक ऐसा आंदोलन शुरू किया जिसके बाद कार से बस नाम की चीज अयोध्या में शुरू हो गई सोना तारीख तो ठीक से नहीं याद है आपको मालूम होगी कार सेवा मैं सबसे आगे राजनाथ सिंह सूर्य रहते थे मुलायम सिंह सबसे ज्यादा अगर परेशान होते थे राजनाथ सिंह सूर्य से वे आमादा हो गए कार सेवा करवाने में इसमें सहयोग उनको मिल रहा था स्वतंत्र भारत अखबार का उस समय स्वतंत्र भारत अखबार लाखों में बिकता था और उसकी बात को ही लोग मानते थे उस समय ना चैनल थे और ना ही कोई और मीडिया राजनाथ सिंह सूर्य ने अयोध्या में कारसेवा शुरू करवाई 30 तारीख को कार सेवा का दिन तय था लेकिन उस दिन मुलायम सिंह ने परिंदा भी पर नहीं मारेगा करके सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी कर दी कि वहां राजनाथ सिंह और उनके साथियों के अलावा कोई नहीं पहुंच पाया राजनाथ सिंह जी से मुलायम सिंह की फोन पर नित्य प्रति उत्तेजना होती मैं आरडी शुक्ला उस समय स्वतंत्र भारत में मुख्य सह संपादक था मुलायम सिंह और राजनाथ सिंह के बीच झगड़ा इस सीमा पर पहुंच गया किशन भारत की बिजली काट दी गई मुकदमे कायम हो गए पुलिस ने उसके भीतर पहुंचकर लाठीचार्ज किया उसके बावजूद सूर्य कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं थे जब 30 तारीख के घोषित कार सेवा कार्यक्रम में वे सफल नहीं हो पाए तो 1 तारीख को जब मैं ड्यूटी पर था और मैं रात की ड्यूटी का चीफ था राजनाथ सिंह सूर्य का निर्देश मेरे पास आया किसी भी हालत में आंदोलन खत्म नहीं होना चाहिए कल कुछ ना कुछ अयोध्या में होना चाहिए मैं बहुत विचलित हो गया उनका कहना था कि अगर राम को मानते हो अयोध्या के इस आंदोलन में मुलायम सिंह को इतना भड़काने वाली खबर लगाओ कि कल वह आपा खो दे हुआ भी यही हमारे लाख इंकार करने के बावजूद उन्होंने सिर्फ यही कहा आपको नौकरी करनी है तो कल अयोध्या में कुछ होना चाहिए मुझे याद है हमारे यहां की लाइट कटी हुई थी स्वतंत्र भारत की चार और पुलिस लगी हुई थी लेकिन उसके बावजूद हम लोगों ने और हमारे साथी जो समय ड्यूटी पर थे हमारे अंडर में जगदीश जोशी रवि पंथ संजय शर्मा आदि बिना लाइट जनरेटर के साथ हम लोगों ने खबर बनाई जो अयोध्या से मिली थी कि आज हिंदू करो या मरो के साथ अयोध्या में कुछ करेगा उस दिन हमारा अखबार कहीं रोका नहीं गया कार सेवा समाप्त हो गई थी अखबार अयोध्या पहुंच गया मुलायम सिंह बहुत नाराज हो गए हमारी हैडलाइन देखकर और उन्होंने सुबह सुभाष जोशी एसपी को गोली चलाने का आदेश दे दिया गोली चली लेकिन उसका परिणाम क्या हुआ स्वतंत्र भारत तो खत्म हो गया लेकिन भारतीय जनता पार्टी जिसके उस समय 2 सदस्य थे मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण आडवाणी आज हो गए 300 यह कारस्तानी करने में राजनाथ सिंह सूर्य को राज्यसभा का मेंबर बनाया गया लेकिन अफसोस है किचन और लोगों ने या हम लोगों ने जान पर खेलकर यह कार्य किया उनको क्या मिला आज बीमार पड़े हुए हैं कोई बीजेपी का नेता देखने वाला नहीं है 2mp से 300mp पहुंचाने का कार्य करने में जो हम लोगों ने कार्य किया उसको कोई पूछने वाला नहीं है उसी के बाद राजनाथ सिंह को 1 सप्ताह बाद ही स्वतंत्र भारत अखबार से निकाल दिया गया और घनश्याम पंकज जो मुलायम सिंह के खास थे उनको संपादक बनाया गया जिस अखबार में 1 सप्ताह पूर्व राम-राम हो रहा था वहां अल्लाह अल्लाह होने लगा आप सोचें पाठक बेवकूफ नहीं होता है स्वतंत्र भारत अखबार तबाह होने लगा धीरे-धीरे वह बैठ गया लाखों कर्मचारियों की नौकरी सड़क पर आ गई आज हालत यह है 1000 कॉपी भी नहीं बनती सब की नौकरी चली गई हम लोग सड़क पर आ गए ना हम राम के रहना अल्लाह के लेकिन इस कुर्बानी का फायदा भाजपा के नेताओं को मिला लेकिन जिस स्वतंत्र भारत ने राजनाथ सूर्य के कहने पर यह सब किया उसके कर्मचारियों को आज क्या-क्या झेलना पड़ रहा है यह वही जानते हैं सूर्य तो राज सभा के मेंबर हो गए बड़े आदमी हो गए लेकिन जो कर्मचारी वाकई में जेल है जिन्होंने लाठी लाठी जेली उनको क्या मिला आज सड़क पर हैं एक पैसे की इनकम नहीं भूखे मर रहे हैं उनके बारे में यह बीजेपी के लोग क्या सोच रहे हैं 2 से 300 बनाने वाले कितनी तकलीफ झेल रहे हैं यह कोई सोच भी नहीं सकता अगर सच्चाई कह दी जाए कि एक बार लाखों लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच गए तो गलत नहीं होगा अब हम लोगों के पास आंदोलन के सिवा कुछ नहीं बचा है