अपराधिक जानकारी मैंने मांगी तो उसको देते समय दीवान के हाथ कांप रहे थे यह किस्सा है बख्शी तालाब थाने के कुख्यात अपराधी राशिद का
August 3, 2019 • UPMA SHUKLA

मुझको अचानक एक दिन स्वतंत्र भारत में संपादक बन कर आए घनश्याम पंकज जी ने अपने कमरे में बुलाया और कहां आरडी अखबार 10000 से ऊपर गिर चुका है कोई ऐसी स्टोरी चाहिए जिससे प्रसार फिर अपनी जगह पर आ जाए अखबार की स्थिति गिर रही है मैं उन दिनों अपराध संवाददाता का काम से अलग बैठा था चौकी में महानगर क्षेत्र से सभासद पार्षद बन चुका था इसलिए मैं ज्यादा कलम नहीं चला रहा था चुपचाप बैठा था इसके अंदर ही काम करता था अब संपादक जी का हुकुम मैं ठुकरा भी नहीं सकता था मैंने ठीक है सर 1 हफ्ते में काम हो जाएगा अब उनके सामने तो मैं हां कराया लेकिन अब समस्या थी कौन सी ऐसी कहानी पकड़ी जाए जिससे एकदम से 10 15000 अखबार हमारे बढ़ जाए सर मैं भी हिम्मत हारने वालों में से नहीं था मैं डरने वालों से मैंने तत्काल सोचना शुरू किया उसी समय एक अपराधी बख्शी तालाब क्षेत्र में जबरदस्त आतंक कायम किए हुए था उसका नाम था राशिद उसमें इतना आतंक मचा रखा था उस क्षेत्र में एक मंत्री भगवती सिंह अपना घर बार छोड़कर लखनऊ में पड़े हुए थे उनके घर में ताला लग गया उसने पुलिस वालों को एक जगह पर पकड़ कर नंगा किया और नचाया बक्शी ताल में उसने कई हत्या कर दी थी जिससे लोग उसके नाम बहुत कांपते थे डरते थे और वह खुलेआम वारदातें कर रहा था हमने सोचा अगर इसके खिलाफ मैंने खबर लगाई तो निश्चित तौर पर बख्शी तालाब क्षेत्र के लोगों को बहुत राहत मिलेगी और हमारा अखबार भी उस क्षेत्र में बढ़ जाएगा यह सब सोचकर मैं राशिद के खिलाफ खबर के लिए बक्शी ताल अपने एक मित्र के साथ पहुंचा सबसे पहले मैं उनके पास गया जहां राशिद दें शमशाद नामक व्यक्ति की हत्या कर दी थी मैं उनकी पत्नी से मिला वहां सुरक्षा लगी हुई थी वह बहुत घबराई हुई थी मैंने उनसे कहा मैं राशि के बारे में जानना चाहता हूं तो उसने कहा साहब उसके बारे में जान आप जरूर लेंगे लेकिन आप कुछ उसका कर नहीं पाएंगे और ना उसके खिलाफ लिख पाएंगे मैंने कहा मैं वैसा नहीं हूं आप मुझे कुछ बताइए उन्होंने कहा आप थाने से उसका इतिहास ले ले यहां तो क्षेत्र में शाम से ही लोग दुकानें बंद करके भाग जाते हैं उसके डर से उनसे मिलने के बाद में मंत्री जी के घर गया वहां मैंने ताला लगा देखा आश्चर्य हो रहा था किसके बारे में कोई ज्यादा बोल नहीं रहा मैं सब जगह की फोटो लेता जा रहा था उसके बाद मैं पहुंचा बख्शी तालाब थाने वहां के दीवान से मैंने राशिद का अपराधिक इतिहास मांगा दीवान जी ने निकाला और जब वह मुझे दे रहे थे तो उनके हाथ कांप रहे थे मैंने का दीवान जी इतना आप लोग घबराते हो बोले हां वह ऐसा ही अपराधी है पुलिस को भी नहीं छोड़ता ठीक मैंने वहां से अपना काम पूरा करने के बाद वापस लौटा फिर उसकी और तहकीकात शुरू की पता चला उसको बहुत ज्यादा नेताओं का सपोर्ट है उस पर कोई हाथ भी नहीं डाल पा रहा है यही नहीं मैं इंदिरानगर थाने गाजीपुर जब भी जाता था रात को तो वहां पता चलता था की डकैती पड़ गई एक व्यक्ति आया और उसने रिवाल्वर निकालकर हमारे बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया और टीवी तेज करके गाना बजाने को कहा उसी बीच में घर वालों को वह जरा घर कि बच्चे को मार देंगे जो भी माल ताल घर का था लूट ले गया इस तरह की उसने दर्जनों वारदातों की उस समय गाजीपुर थाने के ऐसा हुआ करते थे राम मोहन जब भी मैं उनसे पूछता था या उनके साथ घटनास्थल पर जाता था वह एक ही सवाल करते थे आप लोगों ने हल्ला क्यों नहीं मचाया और कितना सामान ले गया कैसा था उसका हुलिया भी राशिद की तरह था राशिद की एक उंगली नहीं थी यही हर आदमी बताता था और दरोगा साहब सिर्फ यह पूछ कर कि कितना माल ले गया है वापस आ जाते थे कारण मुझे पता चला समाजवादी पार्टी की एक प्रमुख नेता जो प्रदेश और देश दोनों जगह मंत्री रह चुके थे वैपबॉस को खुलकर सपोर्ट करते थे वह युवा ही रहता था जब मुझको पूरी जानकारी मिल गई तो मैं अपने संपादक के पास पहुंचा मैंने कहा कि उसका आतंक बहुत है अगर हम खबर देते हैं और बक्शी ताल क्षेत्र में उसका डर भय काट देते हैं तो वहां की जनता जो कह रही है कि कोई उसके खिलाफ नहीं लिख पाएगा वह निश्चित तौर पर हमारा अखबार लेने लगेंगे संपादक जी ने कहा जैसा समझो खतरा देख लेना हमने का सर उसका डर नहीं है और मैंने उसके खिलाफ खबर बना डाली इतनी बड़ी खबर बनाई कि जब सुबह अखबार छपा और राशिद की खबर बक्शी ताल में पढ़ी गई मंत्री जी ने पढ़ा क्योंकि उसमें लिखा था मैंने कि उसके घर से मंत्री भागा हुआ है तो वहां तहलका मच गया और जो मंत्री जी उसको सपोर्ट कर रहे थे सपा के थे उनका सुबह सुबह मेरे पास फोन आया यह क्या कर डाला मैंने कहा मेरा काम ही यही है उसके बाद बक्शी ताल क्षेत्र में स्वतंत्र भारत जबरदस्त बिकने लगा इंदिरा नगर में बिकने लगा उसका भय समाप्त हो गया अगर अखबार चाहे बड़े से बड़े बदमाश का डर जनता के दिमाग से निकाल सकता है बशर्ते हिम्मत करें और वह हिम्मत मैंने की उसके बाद वह भागने लगा और पुलिस उसके पीछे दौड़ने लगी वह भागता भागता नेपाल बॉर्डर के पास रहने लगा हमारी खबर के लगने के बाद से पुलिस अंधाधुंध उसके पीछे लग गई थी उसने उसका पता लगा लिया और वहीं पर उस को मुठभेड़ में मार दिया इसमें सबसे अजूबी बात जो मैं आपको बताने जा रहा हूं कि वह एक दिन हम से मिलने भी आया प्रेस जब खबर छपी वह किसी हमारे साथी के साथ आया था बोला आपने यह क्या कर दिया मैंने कहा अब तेरा भाव बढ़ गया है अभी तक लोग जानते नहीं थे अब तुझे ज्यादा माल मिलेगा मुझे आश्चर्य हुआ कि मैं तो उसे बहला रहा था लेकिन वह इतना खुश हुआ कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं लेकिन हम को शांति तब मिली जब उसको पुलिस मैं नेपाल बॉर्डर पर मुठभेड़ में मार डाला हमारी जीत थी बक्शी ताल से आतंक खत्म हो गया जिससे हर आदमी वहां तंग था मेरा अख़बार का प्रसार बक्शी ताल में ठीक-ठाक बढ़ गया मेरा संपादक बहुत खुश हुआ लेकिन यह सब मामले मामूली खतरनाक नहीं होते हैं यह मैं अपराध संवाददाता का काम करते करते या मैं जानता हूं कि अपराधी किस तरह सताते आरडी शुक्ला द्वारा विशेष कहानियां जारी रहेंगी हमारी वेबसाइट पढ़ते रहिए गा हमारे पास सुंदर खबरों का खजाना है