कुकरेल नदी नाले से फिर नदी बनी
August 3, 2019 • UPMA SHUKLA

कुकडी नदी की ऐतिहासिकता को देखते हुए अभी कुछ दिन पहले उसकी हालत और गंदगी को देखते हुए इंदिरा नहर से एक नाहर छोटी बनाकर उसमें पानी छोड़ा गया अब वह नदी का रूप ले रही है कुकरेल की ऐतिहासिकता जानने के लिए 80 गांव तक जाना पड़ता है जहां से वह निकली है कहा जाता है यह नदी एक कुत्ते की वफादारी के बाद जान देने यह कहानी है और वही से यह यह गोमती नदी में आकर मिलती है कुकरेल नदी के बारे में कहा जाता है कि अगर किसी को कुत्ता काट ले और वह उस नदी में नहा ले तो उसको और कोई दवा करने की जरूरत नहीं पड़ती उसका जहर खत्म हो जाता है यहां हजारों हजार लोग नहाने आते थे जिन को कुत्ते ने काट दिया था यही वजह रही है कि यह नदी पूरे प्रदेश में जानी जाती है यहां के महत्व को देखते हुए अभी कुछ दिन पूर्व इंदिरा नहर से एक छोटी नहर काटकर जलहरा गांव से होते हुए यहां मिलाई गई है जहां से उसको पानी मिल रहा है फिलहाल तो हालत यह हो गई थी कि यह एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो गई थी यहां इंदिरानग र और खुर्रम नगर से निकलने वाले नाले गंदे नाले सिविल लाइन के नारे इसमें मिला दिए गए थे और यह इतनी गंदी हो गई थी किसके करीब से होकर गुजर रहा बदबू देता था जब से राजनाथ सिंह यहां सांसद बने तब से लखनऊ में हो रहे विकास के साथ ही साथ इस नदी का भी विकास हो गया उसके अगल बगल से सुंदर रास्ते निकाले गए और इस नाले को नदी बना दिया गया फिलहाल इस नदी का रूप बहुत सुंदर हो गया है कभी बचपन में हम लोगों ने यहां तैरना सीखा था सुंदर साफ पानी हुआ करता था बीच में एनाले के रूप में परिवर्तित हो गई थी फिर से इसमें पानी डालकर उसको सुंदर बनाया जा रहा है कहां जाता है कुत्ता अगर काट ले और आप यहां नहा ले तो निश्चित तौर पर उसका जहर खत्म हो जाता है हजारों हजार लोग यहां इसी कारण से नहाने आते थे हजारों लोगों के यहां रोजगार चलते हैं लेकिन जब से अगल-बगल कालोनियां बनी और कब्जे बाजी शुरू हो गई तो यह नदी एक गंदी नाली के अलावा कुछ नहीं बची थी लेकिन चलिए फिलहाल इसमें पानी दिख रहा है और एक नदी का रूप भी दिखाई दे रहा है और अगर यह इसी तरह रहा धीरे धीरे यहां दोनों तरफ पर्यटन स्थल भी बनाया जा सकता है यह कार्य हमारे सांसद देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर हो रहा है लखनऊ का विकास सबको खुला दिखाई दे रहा है लखनऊ वासी राजनाथ सिंह को धन्यवाद दे रहे हैं प्रदीप दीक्षित द्वारा