क्राइम रिपोर्टर का दर्द बता रहे हैं आरडी शुक्ला
August 16, 2019 • UPMA SHUKLA

iमित्रों मैं वैसे तो क्राइम रिपोर्टिंग पर पूरी पुस्तक लिख रहा हूं लेकिन उसके कुछ तथ्य गंभीर मैं आपको संक्षेप में यहां भी बताना चाहता हूं कि जिससे हमारी वेबसाइट पर भी आपको कुछ जानकारी मिलती रहे मैं 1980 81 से सबसे बड़े अखबार में क्राइम रिपोर्टर का काम देखने के लिए लगाया गया था वैसे तो आप जानते हैं किसी भी अखबार में या किसी भी मीडिया सेंटर पर तमाम तरीके के रिपोर्टर होते हैं राजनीति देखने वाला सांस्कृतिक देखने वाला नगर देखने वाला स्वास्थ्य देखने वाला इसी तरह जैसे पूरी मुख्यमंत्री जी अपनी कैबिनेट बांटते हैं मंत्री बनाते हैं ठीक उसी तरह संपादक अपनी कैबिनेट तैयार करता है और विभिन्न व्यक्ति को जिनको जिस चित्र का उपयोगी मानता है उसको उस क्षेत्र का कार्य देता है उस व्यक्ति को उसी क्षेत्र में कार्य करना पड़ता है इत्तेफाक की बात थी कि मुझको अपराध संवाददाता का कार्य यानी क्राईम रिर्पोटिंग करने का काम दिया गया यह यह विभाग सबसे खतरनाक विभाग बताया जाता है उसका कारण भी है अन्य क्षेत्रों में खतरे नहीं है लेकिन क्राइम रिपोर्टिंग में हमारा सीधा साथ पुलिस और अपराधियों से होता है और इनसे ज्यादा खतरनाक तो कोई होता नहीं है बचे नेता तो वह भी अगर सत्तारूढ़ हैं तो पुलिस का सहारा लेते हैं या बदमाश का तो इस तरह यह मुझको यह काम सौंपा गया और यह कहकर कि आपको इस काम में अखबार को नंबर वन मनाने के लिए लगाया जा रहा है क्योंकि आप इस कार्य को ठीक से कर सकते हैं वैसे भी मुझे नौकरी करनी थी सो उन्होंने जो काम दिया मैंने शुरू कर दिया मुझे नहीं मालूम था इस काम से ज्यादा खतरनाक और जिंदगी बर्बाद करने वाला कोई काम अखबार जगत में नहीं होता या यूं कहिए मीडिया में नहीं होता जवानी थी जोश से भरा हुआ था सब कुछ भी करने को तैयार हो गया क कहीं पर कोई हत्या हो खून खराबा हो मुठभेड़ हो घटना हो दुर्घटना हो यानी जहां पर भी असंभव कार्य हो और जनता जहां से घबराकर भाग रही हो वहां हमको वहां पहुंचना है और पुलिस को पहुंचना है और पुलिस से पहले ही पहुंच जाना है घटनास्थल पर क्योंकि पुलिस के आने के बाद घटनास्थल से वह चीजें गायब हो जाती है जो हमें फोटो के लिए और देखने के लिए आवश्यक होती थी इसलिए 24 घंटे पुलिस से ज्यादा सतर्क होकर फोटोग्राफर के साथ हमेशा सतर्क रहते हैं किसी भी घटना दुर्घटना के लिए तैयार रहते थे आंधी और तूफान हो कोई सा मौसम हो हमें उसकी परवाह किए बगैर घटनास्थल पर भागना है क्योंकि दुर्घटना का कोई समय नहीं होता है घटना का कोई समय नहीं होता था पता नहीं कब कहां क्या हो जाए और उसके बाद उसी हालत में आकर रात तक हमको अखबार छापने से पहले घटना का पूरा विवरण दे देना अगर हो सके तो फोटो भी देनी है ऐसी हालत में पुलिस से कहीं ज्यादा काम हम लोगों को करना पड़ता था अब वह चाहे घटना गांव में हो देहात में हो शहर में हो गली में हो इसका भी कोई ठिकाना नहीं होता था लौट कर आ कर हम लोग सिर्फ घटना का विवरण लिखने लगते थे अधिकांश बड़ी घटनाएं रात को ही घटित होती है अपराधियों पुलिस रात को ही सक्रिय होते इसलिए पूरी-पूरी पूरी रात हम लोग सड़कों पर रहते थे और खास तौर पर अखबार की मशीन चलने से पहले तो हम लोग पूरी तरह अलर्ट रहते थे सुबेरे और शाम नित्य प्रति पोस्टमार्टम हाउस आपातकाल अस्पताल के जाना हम लोगों की ड्यूटी का हिस्सा था क्योंकि कोई भी मरने वाला स्वाभाविक मौत पोस्टमार्टम में आएगा और घायल आपात काल में पहुंचेगा तो हम लोगों का अस्पताल से सीधा रिश्ता जुड़ा रहता था खून खराबा हम लोगों के लिए जीवन का एक हिस्सा बन गया था पूरे 10 साल रात दिन हमने इस कदर अपराधी कहानियां लिखी वह चाहे पुलिस के खिलाफ हो चाहे अपराधी के खिलाफ या फिर वह चाहे सरकार के खिलाफ हो लिखते रहे और यही नहीं हमने तो छोटे अपराधी से लेकर बड़े तक और बड़े बड़े माफियाओं का इतिहास लिख दिया उनके बारे में पता भी करते थे ठीक इसी तरह पुलिस वालों की खुराफात इस हद तक लिखी कई एक को या यूं कहिए कि मुझ को खुद नहीं मालूम कि सैकड़ों या हजारों कितने पुलिस वालों को मेरी खबर से सजाएं मिली अदालत से तो फांसी तक हुई है ठीक उसी तरह अपराधियों के लिए पता नहीं कितने सैकड़ों हजारों अपराधी हम लोगों के चंगुल में आए और हम खबर लिखने के लिए उनके खिलाफ मजबूर थे हमारी नौकरी थी हर एक खबर पर कितने लोगों से दुश्मनी होती थी इसका हम लोगों को अंदाजा नहीं होता था लेकिन इतना जरूर है कि चाहे वह पुलिस हो या अपराधी हर खबर पर दर्जनों लोगों से सीधी दुश्मनी होती थी हम लोग जान भी नहीं पाते थे लेकिन जिनके खिलाफ हम लिखते थे वह हम लोगों के खिलाफ गांठ बांध के बैठ जाते थे पुलिस के साथ यह है कि वह घर सिविल में है थाने में है तो भी पुलिस है और अगर वह सीआईडी में है तो भी पुलिस है और उसको कवच है लेकिन एक क्राइम रिपोर्टर के साथ ऐसा नहीं था यह भी बहुत बाद में मालूम हुआ जब क्राइम रिपोर्टर को सिविल में यानी टैक्स पर अंदरूनी कामों में लगा दिया जाता है तब उसके जिंदगी की कोई खैरियत नहीं बचती उसके इतने दुश्मन हो चुके होते हैं की वे उस समय एक्टिव होते हैं और अपने बदले लेते हैं  जो कि एक रिपोर्टर को तो मालूम नहीं होता की हजारों खबरों के पीछे के उसके दुश्मन कौन है लेकिन दुश्मन को मालूम होता है के रिपोर्टर कौन है और किसने उसका नुकसान किया वह तो बदला लेता है हमारे साथ भी कुछ नहीं हुआ 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग के बाद जब हम को प्रेस के अंदरूनी कामों में लगा दिया गया तब शुरू हो गया पुलिस और अपराधियों का हम से बदला लेने का कार्य क्योंकि उस समय एक कार्य हम लोग करते थे की पुलिस से पहले हम लोग किसी भी कांड को स्वयं खोलते थे पुलिस को हम लोग हर जगह नीचा दिखाते थे भैया बताते थे कि पुलिस से तेज रिपोर्टर होता है इस पर पुलिस और अपराधी दोनों हम लोगों से खौफ खाते थे अपराधी सोचता था की रिपोर्टर की वजह से मैं पकड़ा गया पुलिस सोचती थी कि हम को नीचा देखना पड़ा इस रिपोर्टर की वजह से हमको सजा मिली उस समय हम लोग पुलिस से जानकारी बहुत कम लेते थे जितना पुलिस से मिले रहते थे उतना ही अपराधियों के बीच में रहते थे पुलिस का झूठ पकड़ने के लिए अपराधियों का सहारा लेते थे यूं कहिए कि लगातार हम लोगों की दुश्मनी या बढ़ती जाती थी अब तो ऐसा माहौल नहीं है लेकिन उस समय जब क्राइम रिपोर्टर से प्रेस के अंदर के काम में लगाए गए तो उसको रिपोर्टर की कमजोरी समझ ली जाती थी और जितने भी दुश्मन पिछले 10 साल में बने चाहे वह पुलिस के हो या माफियाओं के हो वह सब तरह तरह से बदला लेना शुरू करते थे फिलहाल तो हालत यह हो गई थी 10 साल बाद जिन अपराधियों के खिलाफ हमने खूब लिखा था वे सब राजनेता हो गए और उन्होंने शुरू कर दिया तरह-तरह से प्रताड़ित करना कई एक तो मंत्री भी हो गए उनके दिलों में हमारे लिए दुश्मनी भरी हुई थी ठीक उसी तरह पुलिस वालों का हाल था जिन जिन को सजा मिली थी उन्होंने तरह-तरह से अपनी हरकतें शुरू कर दी वह हरकतें क्या थी किस किस तरीके से उन्होंने कैसे कैसे बदले लिए क्योंकि मैं सड़क पर था उनका कुछ नहीं कर सकता था हम से कलम छीन गई थी सो इतना झेलना पड़ा कि उसकी दास्तान पूरी किताब है कहां-कहां पर कैसे कैसे जान बचाई यह पूरी की पूरी एक दास्तान है लेकिन ऊपर वाले का हाथ रहा हमारे ऊपर कि मेरी जान नहीं गई लेकिन लोगों ने मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी हमें फसाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी क्योंकि मैं कोई गलत काम करता नहीं था एक पैसा गलत का कमाया नहीं कोई गलत काम किया नहीं कोई मुकदमा कोई हरकत मेरे खिलाफ थी नहीं इसलिए हमको ईश्वर भी बचाता रहा हां कुछ एक मंदिर जरूर बनाएं आज वह अपराधी वह पुलिस वाले जो हमारी वजह से मारे गए जेलों में बंद हुए वह आज या तो मंत्रियों के रिटायर हो गए आज भी मंत्री हैं करोड़ों अरबों के मालिक हैं वे अपराधी जिनको मैंने सजाएं करवाई वह आज भी हमारे पीछे ही पड़े रहते हैं यह तो कहिए 70 साल बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई यह पार्टी पिछले 70 साल सड़क पर  रही इनके नेता सब कुछ सड़कों से देखते रहे इनको सच्चाई मालूम रही क्योंकि यह भी सड़क पर थे और मैं भी सड़क पर था इसलिए अब कुछ आराम मिला है वरना कांग्रेस सरकार में सपा सरकार में बसपा सरकार में तो इन माफिया और पुलिस वालों का जलवा ही अलग था अब एक साधु सरकार चला रहा है उसको माफिया और अपराधियों से मतलब क्या अब कहीं जाकर थोड़ी राहत मिली है इतने अधिक हमले हुए मेरे ऊपर कि मैं बचाव करते करते और भागते भागते थक गया मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि यह सब मुझे जिंदा छोड़ेंगे लेकिन देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार प्रदेश में योगी जी की सरकार बनने के बाद जीने की कुछ आस हो गई क्योंकि मैंने देश प्रदेश किसी भी माफिया को बख्शा नहीं था किसी भी गलत पुलिस वाले को चाहे वह कितना बड़ा अधिकारी हो मैंने छोड़ा नहीं था और वह सब हमको नहीं छोड़ना चाहते थे मेरा घर से लेकर बाहर तक मंदिर से लेकर दुकान तक जो कुछ भी मेरा था घर परिवार सब लूट लिया मैंने आज तक ₹100 भी नहीं कमाए अभी हम मुझे 2 फरवरी को कचहरी में हार्ट अटैक हुआ था वकीलों ने अस्पताल पहुंचाया प्रेस वालों ने चंदा किया योगी जी ने पैसा दिया तब मेरी जान बची ठीक इसी तरह जब एक बार मैं दुश्मनों मैं फंस गया था तब मुझे महानगर की जनता ने अपने क्षेत्र से सभासद चुन दिया था उस समय प्रेस मेरी कलम छीन ली गई थी मुझे जनता ने बचाया क्योंकि मैंने जो भी काम किया वह जनता के हित में किया किसी को पिन तक नहीं छुपाई अपने को तकलीफ देकर दूसरों की मदद की सभासद के का समय में ही हमने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली थी बस उसी का मुझको आज लाभ मिल रहा है मैंने पैसा नहीं कमाया मेरे ऊपर कोई मुकदमा नहीं है मैं सन 1976 का रजिस्टर्ड अधिवक्ता भी हूं कुल इन्हीं वजहों से यह अपराधियों पुलिस और नेताओं का गठजोड़ अब तक मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाया हां अगर कुछ बिगाड़ पाया तो मेरे पूरे परिवार को नष्ट कर दिया फिर भी गरीब होने के बावजूद हमारे बाल बच्चे अच्छे हैं और अच्छे विचार के हैं वह गलत रास्तों पर नहीं गए यह भगवान की कृपा रही बाकी मैं या क्रम जारी रखूंगा कि किस किस तरह से और कैसे कैसे प्रहार मेरे ऊपर होते रहे या एक क्राइम रिपोर्टर को कितना सहना पड़ता है इसका सिलसिला में जारी रखूंगा आपका क्राइम रिपोर्टर आरडी शुक्ला