बहुत कुछ हो गया अल्लाह रखे कोठे में नक्कास में
July 15, 2019 • UPMA SHUKLA
  • क्या बताऊं जीवन पता नहीं कहां से किसको कहां ले जाता है ठीक उसी तरह हमको नवाबों के बाद पहुंचा दिया गया कोठे पर लेकिन वह कोठे नहीं थे जहां पर मुजरे होते हैं यहां पर नवाब रुपया पैसा मोरे सोना चांदी बिखेरा करते थे रात को हम पहुंचे वहां पर जहां से मेरी जिंदगी बिखर गई सिर्फ वहां मोहब्बत ही मोहब्बत थी और वह भी ऐसी मोहब्बत जिसकी कोई मिसाल नहीं थी इज्जत और नफासत सुंदरता थी कोई भी याद में फिसल के गिर पड़ता मैं मैं तो केवल एक 20 और 22 साल का छोकरा था उस समय लखनऊ में सिनेमा के अलावा कुछ था ही नहीं सिनेमा भी कितना देखा जाए मैं पहुंच गया लखनऊ के सबसे बड़े सुंदर आलीशान कोठे पर वही दिन रात गुजरने लगा बहुत अच्छा लगता था गजल की कि वह महफिल और उस पर लखनऊ के कत्थक का वह नजारा इन जिसकी आप लोग भनक भी नहीं पा सकते नवाब वहा बागियों और गाड़ियों से आते थे लाखों-करोड़ों पर लुटाते थे मैं वहां मात्र एक मोटर साइकिल से पहुंच जाता था और वहां का नजारा आप सब सोच भी नहीं सकते थे बेहतरीन नक्काशी धार कमरे सुंदर महफिल गाने बजाने वाले लोग सुंदर सुंदर गाने बजाने वाली सुंदर आवाज वाली हमको तो बहुत पसंद थी मैं उन्हीं में कोई मिल गया ना मैंने देखा आगे ना मैंने देखा पीछे क्योंकि लखनऊ में कुछ था ही नहीं सीधा बागों के और सुंदर एस लखनऊ के माहौल को चीरता हुआ में चौक के नखास में पहुंच जाता था रोज रात को जहां नवाब मौज मस्ती करते थे मैं वहां पर संगीत की दुनिया में डूब जाता था अब आप चाहे जो कहें सारी मोहब्बत सारा प्यार सारा हिसाब किताब मेरी जिंदगी का वहीं पर खुला और मैं करता क्या अखिल लखनऊ में वहां के अलावा था क्या सुंदर परियों का देश सुंदर संगीत का आनंद अब वहां से अच्छा और मिलता क्या अच्छे स्कूलों में पढ़ते गए और बिगड़ते गए घूम कोई देखने वाला तो था नहीं महानगर से गाड़ी उठाई और पहुंच गए जन्नत में जिस जन्नत को खोजने के लिए आलोक लाखों-करोड़ों पर बर्बाद करते हैं उस समय भी नवाब पता नहीं कितनी मोहर है सोना चांदी बर्बाद किया करते थे लेकिन हम नहीं क्योंकि मेरे पास कोई पैसा नहीं था मेरे पिता नहीं थे बस मैं रंगीली अत में पड़ गया था और रंगीन मिजाज हो गया था मुझे बोलो खुद चाहने लगे थे यहां तक कि मेरे पास कुछ नहीं होता था तो सारा खर्चा भी वही लोग उठाते थे वह जो जहां पर दुनिया उनको पैसा देती थी वहां पर मुझे और शौक पूरा करने का पैसा मिलता था जो आनंद मैंने लखनऊ में लिया शायद ही किसी को मिला हो बहुत कुछ तो नहीं खोल सकता लेकिन इतना जरूर है कोठे का एक अलग आनंद होता है वहां केवल मुजरा या गाना नहीं होता वहां तहजीब और एक ऐसी भाषा सिखाई जाती है जो जिंदगी भर काम आती है बड़े-बड़े नवाबों के घर के लड़के वहां इसलिए भेजे जाते थे जो तहजीब सीख ले बात करने का तरीका सीख ले हम तो बिना किसी मोल भाव और पैसे के वहां बहुत इज्जत से बैठा ले जाते थे बहुत छोटी उम्र थी बहुत नादान थे बहुत सुंदर वातावरण था यूं कहिए कि जो कुछ हमें मिला उसके बारे में बड़े बड़े सोच भी नहीं सकते ठीक है उन्होंने जो चीजें सिखाएं संगीत सिखाया बात करना होता है जी नफासत नजाकत जो चीजें सीखी हमने वह उसी कोठे की देन है उसके बाद वह कोठे समाप्त हो गए वहां से लोग फिल्मों में चले गए टेलीविजन में चले गए रेडियो में समा गए स्टेज प्रोग्राम में काम करने लगे लेकिन वह व्यक्तिगत तौर पर किसी को नहीं मिले वहां के खाली पर है नवाब शायर शायद उनसे आखिरी बार नहीं मिल पाया लिखते तो लखनऊ के बारे में बहुत लोग हैं जरा आकर हमसे बात करके देखें क्या उन्होंने वह चीजें देखी हैं क्या उन्होंने वह घर देखे हैं जो सुंदरता की मिसाल थे जिनकी नक्काशी कमरों की जो रौनक बढ़ा तिथि क्या उन्होंने देखी है क्या उनके पास कोई उसकी फोटो है तो वह किस तरह से लिखते हैं नवाबों के बारे में लखनऊ के बारे में क्या जानते हैं सिर्फ झूठ बोलते हैं हमने तो देखा हम साथ रहे हैं उनके यह मोहब्बत का शहर यह प्यार का शहर जिसने मोहब्बत की जिंदगी दी चाहे उसने हम को बर्बाद कर दिया लेकिन उसने हमसे कोई गुनाह नहीं होने दिया तो क्या यह जिंदगी कोई बुरी थी आज जो हो रहा है क्या वह बहुत सही है गली गली खून हो रहा है लूट बलवा बवाल हत्या यह सब क्या है यह लखनऊ में नहीं होता था नहीं यह लखनऊ की चीज है यहां जो भी होता था उसकी एक सुंदरता थी यहां गजलें होती थी शाम ए गजल होती थी यहां महफिले लगती थी रात गए तक लोग मुजरे सुनते थे गजलों की महफिलों में जाते थे हम भी जाते थे किसी तरह का कोई अपराध नहीं होता था आज क्या हो रहा है लखनऊ की सड़कें लोहे की गाड़ियों से फटी हुई है भीड़ इस कदर है कि आदमी एक दूसरे के ऊपर चढ़ाया रहा है अब आप खुद सोचिए कि लखनऊ में क्या हो रहा है वह पहले का लखनऊ बाघों का नवाबों का सुंदर लखनऊ आज कंक्रीट के पत्थरों से ढक गया है जहां ना हवा है खुला वातावरण है सिर्फ प्रदूषण है जहां बाग सड़कों के किनारे पेड़ पेड़ पेड़ हुआ करते थे आज वहां क्या है सांस लेने की जगह नहीं है सिर्फ गाड़ियों का धुआं धुआं धुआं है अगर यह जारी रहा तो लखनऊ की क्या हालत होगी बीमारियों से ग्रस्त हो गया है लखनऊ सुंदर रंगीन माहौल वाला यह लखनऊ काले धुएं के गर्भ में पल रहा है बचपन से बुढ़ापे तक लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं अखिलेश के लिए क्या इलाज है पुराना लखनऊ तो वापस नहीं आ सकता लेकिन क्या हम अपने लखनऊ को बचाने के लिए सरकार की नीतियों का उपयोग नहीं कर सकते लखनऊ को बचाना है लखनऊ में मोहब्बत और नफासत और नजाकत का माहौल पैदा करना है तो एक बार एक आंदोलन की जरूरत पड़ेगी बहुत कुछ बदल जाएगा आज मकान के ऊपर मकान भीड़ के ऊपर भीड़ यह जाएगी कहां रहेगी कहां खाएगी कहां लखनऊ में तो इतने कारखाने भी नहीं है सरकारी कार्यालयों में इतने जॉब भी नहीं है अच्छा होगा कि अब अपने गांव घर छोड़ने से पहले लोग यह सोच ले कि लखनऊ भर चुका है अब इसको ज्यादा ना भरे कहीं से सांस लेने की जगह यहां रहने दे अगर आप नहीं मानेंगे तो यहां अभी मुंबई और दिल्ली जैसी हालत हो जाएगी मां ने ऐसी हालत हो भी चुकी है फिलहाल अभी लखनऊ की हालत इतनी नाजुक नहीं है किस को एकदम बदहाल लखनऊ कहा जा सके यकीन बहुत खूबसूरत लखनऊ भी नहीं कहा जा सकता बेतरतीब बसते जा रहे लखनऊ कुछ संभालना है अगर तो यह हमको आपको सबको मिलकर करना होगा पेड़ लगाने होंगे प्रदूषण मुक्त करना होगा यह काम सरकार नहीं कर सकती नई सरकार के अकेले बस में है सरकार को भी हमारा सहारा चाहिए अपराधियों ने यहां डेरा जमा लिया वह खुलकर खुराफात कर रहे हैं उनका भी लाज करना होगा पुलिस काम है और जनता ज्यादा है अब देखना यह है कि लखनऊ कब तक शांत प्रिय स्थिति में रहता है फिलहाल तो है लेकिन आगे चलकर हमको नहीं लगता कि यहां हालात ऐसे ही रहेंगे इसलिए लखनऊ को सुधारो खुद सुधरो तभी हालात सुधरेंगे मैं आरडी शुक्ला आपसे निवेदन करता हूं लखनऊ को बर्बाद मत करो लखनऊ बहुत प्यारी चीज नहीं है इसको प्यारा रहने दो मोहब्बत का शहर रहा है यहां मोहब्बत मोहब्बत ही रहने दो इसको खून खराबा और गलत कार्यों का स्थान मत बनने दो धन्यवाद लखनऊ की कहानी जारी रहेगी