बिल हटी का जंगल जहां 2 दर्जन से अधिक आदमी और औरतों का हड्डियों का कंकाल देखकर कलेजा कांप उठा पता चला यहां लखनऊ और आसपास के जिलों से अपराधी लोगों का अपरहण करके लाते हैं और मार कर फेंक देते हैं फिरौन की लाश को गिद्ध 1 घंटे में चट कर जाते हैं अब सुनाते हैं उस जंगल की सनसनीखेज कहानी
August 29, 2019 • UPMA SHUKLA

आर डी शुक्ला द्वारा   यह बात है सन 1984 पचासी की हमको पता चला कि लखनऊ से पीस 40 किलोमीटर दूर कुर्सी रोड पर एक बिलहरी का जंगल है जहां पर दर्जनों लाशें पड़ी हुई हैं विन जिनको लखनऊ के आसपास से अपराधी उठाकर ले गए और मार कर फेंक दिया उसमें औरतें भी हैं और आदमी भी है उस जंगल में किसी की जाने की हिम्मत नहीं है पुलिस तो जाती ही नहीं है जब इतनी सूचना मिली तो हमने सूचना देने वाले पुलिस और अपराधी के सूत्रों के साथ मिलकर वहां जाने का कार्यक्रम बनाया पता यह चला किस जंगल में जाना आसान काम नहीं है लेकिन हमने भी ठान लिया कि मैं वहां जाऊंगा और वहां से खबर लाकर अपने अखबार में छाप लूंगा एक दिन अपने मालिक जयपुरिया जी से मैंने उनकी मारुति कार मांगी उस समय लखनऊ में सिर्फ पांच मारुति सैंपल के तौर पर आई थी उसी में से एक जयपुरिया जी को मिली थी वह गाड़ी मैंने उनसे मांगली और एक कुख्यात अपराधी जिसको की उस जंगल की पूरी गतिविधियां मालूम थी उसको साथ में लिया और साथ में एक हथियारबंद दरोगा को लखनऊ से 30 40 किलोमीटर दूरी पर व जंगल था कुर्सी रोड पर आजकल तो वहां कुछ और ही है माहौल है लेकिन उस समय की बता रहा हूं की घनघोर जंगल था और जंगल के बीच में दो ना ले मिले जिस को पार करने के लिए मारुति कार को उठाकर हम लोगों ने नाला पार कराया व कुख्यात अपराधी भी हथियार लिए हुए था और दरोगा साहब भी जब हम लोग जंगल के बीच में पहुंचे तो वहां 500 से ऊपर गिद्ध बैठे मंडराते दिखाई दिए ठीक उसी जगह पर जब हम लोग पहुंचे गाड़ी हम लोगों ने बहुत पीछे छोड़ दी थी पैदल ही 10:00 15 किलोमीटर चल के जब उन गिद्धों के पास पहुंचे तो वहां की हालत देखकर रूह कांप गई साथ में फोटोग्राफर था मेरे सामने औरतों और आदमियों के हड्डियों के कंकाल बिखरे पड़े थे औरतों की चोटियां दिखाई दे रही थी और हड्डियां चोटियों से मालूम हो रहा था यह औरतें हैं आदमी भी पता चल रहे थे दोनों के नरमुंड पड़े हुए थे लगभग दो दर्जन लेकिन उन पर कपड़े नहीं थे उस अपराधी ने बताया यहां पास में कुआं है अपराधी जब अपराहन करके किसी को यहां लाते हैं तो मार कर उसके कपड़े इस कुएं में फेंक देते हैं और लाश को नंगा जंगल में वहां इतने गिद्ध दिखाई दे रहे थे क्यों 1 घंटे भर में एक आदमी के शरीर का गोश्त हाड मास चट कर जाते थे हम लोगों ने वहां बारीकी से सतर्कता से हर चीज का मुआयना किया फोटो खींची और यह अनुमान लगाया कि यहां लखनऊ सीतापुर हरदोई बाराबंकी आदि जिलों से औरतों और आदमियों का अपहरण करके अपराधी यहां लाते हैं और उनकी हत्या करके लाश को यहां फेंक देते हैं बाद में गिद्ध उनको खाकर उनका नामोनिशान मिटा देते है और अगर कुछ बचता है तो उनके शरीर की हड्डियां कपड़े भी उस कुएं के अंदर डाल दिए जाते हैं वह कुख्यात अपराधी जो हम लोगों के साथ गया था उसके दो साथियों का अपरहण करके इसी जंगल में लाकर मार दिया गया था उनका पता उस अपराधी ने कुए में मिले कपड़ों से शिनाख्त करके किया था और पुलिस को बताया था बाकी और कुछ नहीं मिला था उसी के बाद यह सूचना हमको मिली थी यह कैसा खतरनाक जंगल है जहां नित्य प्रति एक आध लोगों को मार दिया जाता हम लोग सुबह से उस जंगल में घुसे थे और दिन भर काम करने के बाद पूरी छानबीन करने के बाद शाम को वहां से निकल पाए थे वह भी अंधेरा होने लगा था वहां से पूरी खबर लेने के बाद फोटो है लेने के बाद जब प्रमाण हाथ में लग गए तो मैं शाम को अपने स्वतंत्र भारत प्रेस आया और अपने संपादक को वह फोटोग्राफ जिसमें औरतों के कंकाल और उनके बाल आदमियों के कंकाल की फोटो है थी दर्जनों जब दिखाएं तो सभी हैरत में पड़ गए सब के रोंगटे खड़े हो गए हमारे संपादक बहुत दिलेर थे उन्होंने पहले पन्ने पर बहुत बड़ी खबर लगाई खबर मेरे नाम से थी दूसरे दिन पुलिस महकमे में हंगामा मच गया क्योंकि पुलिस को भी उस जंगल के बारे में हत्याओं के बारे में कि वहां इतनी लाशें पड़ी है नहीं मालूम था वरिष्ठ अधिकारियों दूसरे देनी दौरा किया और जंगल के भीतर जमके छानबीन की गई हमारी खबर सच्ची निकली पूरे जंगल को तारों से घेर दिया गया चौकी बना दी गई वहां लेकिन आज वहां शहर बन चुका है मकान बन चुके हैं लखनऊ और सीतापुर का वह बॉर्डर शानदार शहर में परिवर्तित हो गया लेकिन मैंने जो देखा था बियाबान जंगल तब रूह कांप गई थी लाशों को देखकर तब तक किसी को नहीं मालूम था किस जंगल का उपयोग अपराधी किस तरीके से कर रहे हैं महिलाओं को वहां ले जाकर वह किस तरह मारते थे कुकर्म करते थे आदमियों की हत्या करके ला से फेंक दिया करते थे उस समय वहां इतने गिद्ध हुआ करते थे कि वहां थोड़ी देर में ही आदमी का हाड मास वह साफ कर देते थे सबूत ही मिट जाता था जब मैंने यह खबर लिखी इतनी ज्यादा चर्चा हुई इस जंगल की कि चारों ओर महीनों सालों इस जंगल के बारे में तरह तरह की कहानियां होती रही अब आज वहां की हालत निश्चित तौर पर पूरी तरह बदली हुई होगी