मुझको क्यों बचाया ईश्वर ने
March 14, 2019 • UPMA SHUKLA

कहते हैं कि नेकी कर गठन में डाल और यही मेरा जीवन का पूरा इतिहास है यही मेरा भूगोल है अब मैं आपको पिछले माह 2 फरवरी को घटी एक घटना के बारे में बताना चाहता हूं जिसमें मैं चमत्कारिक रूप से बच गया हुआ यूं 2 फरवरी को मैं एक साहब के काम से लखनऊ के कलेक्ट्रेट में पहुंच गया वहां मैं जैन साहब के लिए गया था वह हम को लेकर अपने वकील साहब केदार सिंह के पास पहुंच गए इत्तेफाक की बात थी केदार सिंह जी से जब मेरी बातचीत शुरू हुई मैंने बताया मैं इनके मदद के लिए आया हूं तो उन्होंने मेरा पूरा परिचय पूछा मैंने बताया कि मैंने 1976 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी और एमकॉम इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन डबल डिग्री कोर्स में किया है वह हंसे और बोले कि मैंने भी उसी वर्ष डबल डिग्री कोर्स में एलएलबी और m.a. किया है फिर उन्होंने कहा कि आप उस सीबी सिंह जी को जानते हैं मैंने कहा वह तो हमारे गुरु हैं कॉफी हाउस के ऊपर बैठते हैं उन्होंने कहा वह हमारे भी परम में से हैं और अब तक हम दोनों जनों के बीच अच्छी खासी दोस्ती हो गई इस बीच मैं जिसके काम से गया था उसने हमसे अदालत में चलने को कहा इस पर वकील केदार सिंह जी ने उसको डांटा और कहा शुक्ला जी को कहां ले जाओगे हमारे लड़के वहां है तुम जाओ और पेशी करके आओ उसको वहां से रवाना कर दिया हमसे उनकी बातचीत होने लगी हम लोग कोई मिल गए उन्होंने शुक्ला जी आइए चलते हैं 21 जगह हमारी पेशी है वह निपटा के फिर हम आप बैठकर कुछ बातें करेंगे मैं उनके साथ चल दिया मैं बिल्कुल ठीक-ठाक था वह पहले एक अदालत में गए वहां उन्होंने तारीख ली फिर वह एडीएम पूर्वी के यहां किसी केस मैं गवाही करवाने लगे हमसे बोले शुक्ला जी आप थोड़ी देर बैठ जाओ मैं गवाही करा कर आता हूं मैं बाहर बैठ गया कुछ देर ही बीता होगा मुझे कुछ आंखों के सामने से अंधेरा छाने लगा सीने में दर्द होने लगा वकील साहब अंदर गवाही करा रहे थे तो मैंने सोचा कहीं चल कर पानी पी ले तो सामने पराग का स्टाइल बना हुआ था मेरी घबराहट बढ़ती जा रही थी मैं जल्दी- जल्दी पराग के स्टाइल के पास पहुंचा वहां पहुंचते ही अचानक मेरी आंख के सामने अंधेरा छा गया और मैं वहां गिर गया मेरे सीने में बहुत तेज दर्द होने लगा और धीरे-धीरे मैं बेहोश होने लगा ठीक मेरे पीछे कुछ औरतें बैठी हुई थी जो जेल से आए लोगों से मिलने आई थी वह चिल्लाने लगी देखो इस आदमी को क्या हो गया है इसके हाथ पैर डिले हो रहे हैं ठीक इसी समय वहां पर उत्तर प्रदेश पुलिस का एक गनर मेरे पास पहुंचा मेरे हाथ पर देखने के बाद जल्दी बोला तो बताओ किसके साथ हो जब मेरे मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी तो उसने काफी तेजी से हम को हिलाया तो मैंने उससे काम है वकील केदार सिंह जी के पास आया हूं वह एडीएम पूर्वी जहां बैठे हैं वह पुलिस वाला दौड़ता हुआ एडीएम पूर्वी के यहां पहुंचा और उसने वकील केदार सिंह जी से बताया कि आपका कोई आदमी बाहर गिर गया है उसकी हालत बहुत खराब है तुरंत वकील साहब वहां से निकल कर हमारे पास आए उन्होंने जब मेरी हालत गंभीर देखी तो तुरंत अपने दो वकील शिष्यों को तत्काल मुझे अस्पताल ले जाने के लिए हुकुम दिया वकील इतनी तेजी से गाड़ी लाए कि मैं समझ भी नहीं पाया कब उन्होंने मुझे गाड़ी पर ला दिया केदार सिंह जी का हुकुम था किसी कीमत पर इनको जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाओ मैं कुछ नहीं समझ रहा था मैं अर्ध विक्षिप्त था बस सीने में दर्द की बात वकीलों से कह रहा था एक वकील मेरे सीने को मार रहा था पूछा कहां किस अस्पताल ले चले मेरा इलाज पहले सिविल अस्पताल में था तो मैंने कहा वहां ले चलो बहुत तेज गाड़ी चलाते हुए बिना रुके 10 और 15 मिनट के अंदर मुझे सिविल अस्पताल पहुंचा दिया भाग्य की बात उस समय आपातकाल में हृदय रोग विशेषज्ञ सिंघानिया जी की ड्यूटी थी वह हमको पहले से जानते थे हमारे स्वतंत्र भारत अखबार के मालिक श्री जयपुरिया जी के रिश्तेदार भी थे इसलिए मेरे संबंधों से कुछ दिन पहले हो गए थे उन्होंने मुझे देखा तुरंत मेरा परीक्षण किया और मुझसे बोले कि जल्दी से तुम अपने घर के किसी आदमी का फोन नंबर दो मुझको ऑक्सीजन लगा और दवाएं दी इत्तेफाक की बात कि मुझे किसी के जवानी नंबर नहीं याद थे सिर्फ एक नंबर संपादक मीडिया उपमा शुक्ला का याद था मैंने डॉक्टर साहब को वह नंबर किसी तरह बताया उन्होंने तत्काल उपमा को फोन मिलाया उस समय में बेहोश हो चुका था लगभग उपमा बगल में सूचना विभाग में ही मौजूद थी डॉक्टर साहब ने उससे तुरंत सिविल अस्पताल आने को कहा करीब में होने के कारण हो 5 मिनट में अस्पताल पहुंच गए डॉक्टर साहब ने उसको बताया कि मेरी हालत ठीक नहीं है मुझे हार्ट अटैक हो गया है तुरंत लारी ले जाओ वरना जान नहीं बचेगी भाग्य था कि नीचे एंबुलेंस भी खड़ी थी उपमा ने तुरंत फैसला किया डॉक्टर साहब ने रेफर किया और एंबुलेंस पर बैठाकर तुरंत लारी की ओर रवाना हो गई भाग्य की बात थी कि हजरत गंज से लारी तक कहीं कोई जाम नहीं मिला लारी में पहुंचते ही डॉक्टरों ने जब मेरी हालत देखी तो तत्काल भर्ती कर लिया और वहां मेरा इलाज शुरू हो गया क्योंकि मैं सही समय पर वहां पहुंच गया था तो दूसरे दिन हमारी एनजीओ या फिर भी हो गई जोनस मिली मेरी ब्लॉग थी उसको डॉक्टरों ने खोल दिया और मुझे आराम मिलने लगा मिलने लगा क्योंकि वहां पर हृदय रोग की सुंदर इलाज की व्यवस्था है डॉक्टर भी बहुत अच्छे हैं मुझे अखिल शर्मा जी देख रहे थे उन्होंने मुझे लगभग खतरे से बाहर निकाल दिया तीन-चार दिन बाद कुछ हालात हमारे ठीक होने लगे फिर मैंने सोचा बताओ भाग्य से जि जिन पुलिस वालों को हम सब दिन-रात गालियां देते हैं उनको बुरा कहते हैं वहीं गनर पुलिसवाला सबसे पहले आगे आया और उसने सबसे बड़ी मदद की वैसे मैं पुलिस का बहुत ही बड़ा भक्त हूं और बहुत ही प्रशंसक हूं इससे पहले भी कई बार पुलिस ने हमारी जान बचाई है इसके बाद बाद आती है वकीलों की जिनको बहुत बुरा कहता है सब मैं भी वकील हूं अगर वह जो वकील सारे रास्ते की भीड़ चीरते हुए 15 मिनट के अंदर मुझे सिविल अस्पताल नहीं पहुंचाते तो डॉक्टरों के हिसाब से मेरा बचपना नामुमकिन था वकील भी बहुत खराब कहे जाते है फिर तीसरा लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जिसे मैं खुद भी शामिल हूं उपमा शुक्ला का 5 मिनट में अस्पताल पहुंच जाना सबसे महत्वपूर्ण रहा और चौथा डॉक्टर मेरे पिताजी भी डॉक्टर थे जिन्होंने तुरंत मुझे उचित अस्पताल लारी भेज दिया कहीं किसी ने एक पैसे की लालच नहीं की सबने सब व्यवहार की वजह से मेरी पुरानी ने की को देखते हुए मुझे बचा लिया अब आप सोचें सब कुछ पैसा होता तो शायद उत्तर प्रदेश पुलिस का वह गाना मेरी हालत देखने के बाद वहां से निकल लेता क्योंकि मैं बिल्कुल मरने की हालत में था हाथ पैर ठंडे हो चुके थे उपमा शुक्ला भी अपने को किनारे कर सकती थी वह पत्रकार थी और महिला थी ठीक इसी तरह काले कोर्ट वकीलों ने जिस स्पीड से गाड़ी भगाई और अस्पताल पहुंचाया वह भी तो बहुत बुरे कहे जाते हैं उसके बाद बारी आती है सफेद कोट डॉक्टर जिन्होंने उचित इलाज करके मेरी जान बचाई फिलहाल तो मैं जिंदा हूं और इस जिंदगी को मैं पुलिस वकील डॉक्टर के नाम कर चुका हूं  बाकी लोग तो बाद में पहुंचे डॉक्टरों का साफ कहना था थोड़ी और देर होती तो आप नहीं बच सकते थे जबकि मैं तो बेहोश हो गया था मुझे तो कुछ मालूम भी नहीं था क्या किन किन लोगों ने मेरी मदद की इसी को कहते हैं जाको राखे साइयां मार सके ना कोई बाल न बांका कर सके चाहे जग बैरी हो जाए यहीं पर ईश्वर समझ में आता है कि आखिर उसको हमें जिंदा रखना था क्योंकि मैं एक किताब कलम से खून तक पूरी करना चाहता हूं बस उसी के लिए जिंदा भी रहना चाहता हूं और भगवान ने वह इच्छा शायद मेरी पूरी करनी है अब आप देखें शासन-प्रशासन वरिष्ठ पत्रकार कादुर सहयोग मैंने मेरे पास जितना भी पैसा था वह मैंने लाखों रुपया लगा दिया अपने इलाज में उसके बाद मैंने शासन से सहयोग मांगा मैं 1990 से जब मैं सभासद था भारतीय जनता पार्टी के साथ हूं उस समय मेयर का चुनाव अखिलेश दास लड़ रहे थे 15 लाख रुपए वोट देने के लिए देने का ऑफर दिया लेकिन मैं दिनेश शर्मा जी के साथ उन पैसों को लात मार के चला चला आया और बीजेपी को वोट दिया लेकिन अफसोस है कि आज मैं एक ऑपरेशन करा चुका हूं अभी दो नसों में हमारे और खराबी है उसका इलाज होना है मैं प्रदेश का सबसे वरिष्ठ पत्रकार हूं वरिष्ठ अ अधिवक्ता हूं पूर्व बीजेपी का सभासद हूं यकीन मानिए मेरी एप्लीकेशन वहां लगी हुई है 1 सप्ताह बीत चुका है ना तो कोई मुझे देखने आया और ना ही उस एप्लीकेशन में अभी तक कोई कार्यवाही हुई मैं वरिष्ठ पत्रकार होने के नाते मान्यता का फार्म भी भर रखा है मैंने सूचना निर्देशक महोदय सिर्फ हाथ पैर जोड़कर प्रार्थना कि मेरी जिंदगी का सवाल है मेरी मान्यता स्वतंत्र पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार किसी में कर दीजिए मैं तीसरी मंजिल पर 86 से रह रहा हूं डॉक्टर ने मुझे नीचे उतरने से मना कर दिया है मैंने सारे कागजात दे दिए यकीन मानिए इस बंदे गरीब वरिष्ठ पत्रकार की कोई सुनने वाला नहीं है मैंने लिख कर दिया कि मुझे सिर्फ ₹1000 मासिक पेंशन मिलती है मैं इलाज कराने पाने में असमर्थ हूं उत्तर प्रदेश पुलिस ने तो साथ दिया वकीलों ने साथ दिया पत्रकार ने साथ दिया डॉक्टरों ने बिन पैसे साथ दिया लेकिन सरकार यू कहा कि जिसके कारण ही में मेरी यह दशा हुई है आज तक आगे का मैं इलाज नहीं करा पा रहा हूं सब इमानदारी की बात करते हैं पूरा लखनऊ क्या प्रदेश जानता है कि मैंने आज तक ₹100 नहीं कमाए और सबसे बड़े अखबार स्वतंत्र भारत मैं मैं काम करता रहा लोग अपने भवन बनाते बना रहे थे तो मैं महानगर में मंदिर बनवा रहा था और वह भी मिट्टी और ईट एड होकर आज वही आरडी शुक्ला आज अपना इलाज नहीं करवा पा रहा है उसकी शासन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है मैंने भी सोच रखा है कि मरना तो एक बार है कुछ दिन और इंतजार करने के बाद मैं स्वयं अपने आप को खत्म कर लूंगा क्योंकि मेरे पास पैसा नहीं है मेरे पास कोई भवन जमीन नहीं है इतने बड़े हार्ट अटैक के बाद अब मरना तो है ही है जबकि मैं सभासद निर्दलीय जीता था इसके बावजूद लाखों रुपए छोड़कर अखिलेश दास जैसे पैसे वाले को लात मारकर मैंने भारतीय जनता पार्टी को वोट दिया और आज उन्हीं की सरकार में मैं बिस्तर पर पड़ा तड़प रहा हूं मैं 1984 से प्रदेश सरकार की मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में था आज नए नवेले पत्रकारों को फर्जी पत्रकारों को मान्यता दी जा रही है और मुझको 40 साल से पत्रकारिता करने के बाद भीख मांग मांग कर अपना इलाज कराना पड़ रहा है लगभग पूरे लखनऊ की सेवा की है लखनऊ पूरा प्रदेश जानता है कि मैंने आज तक ₹100 भी किसी से नहीं लिए मुझे इस तरह के अंत का कभी अंदाजा नहीं था हां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से एक बार मिलकर मैं पूरी कहानी कह कर स्वयं आत्मदाह कर लूंगा मैंने शासन-प्रशासन खास तौर पर पुलिस की इतनी मदद की है अपराधी मुझे किसी कीमत पर जिंदा नहीं छोड़ते यह तो सिर्फ पुलिस का वरदान है कि उसने आज तक मुझे जिंदा रखा आखिर में भी एक अनजान गनर पुलिस वाले नहीं मेरी जान बचाई है मुझको शासन से इस बेरुखी का कतई स्वप्न में भी आभास नहीं था अब मैं क्या करूं