राजनीति का अपराधीकरण कांग्रेस की देन
July 1, 2019 • UPMA SHUKLA

दोस्तों मैं आरडी शुक्ला आज आपको वह बताने जा रहा हूं जिसको मैंने अपनी आंखों से देखा महसूस किया और झेला है मुझे याद है सन 1975 के बाद जो भी छात्र नेता या राजनीतिक कांग्रेश की खिलाफत करता था उसको तुरंत जेल में डाल दिया जाता था और जेल में भी कई कई दिन रखा जाता था उसी जेल में रखा जाता था जहां कुख्यात अपराधी रहते थे इंटर के छात्रों को हाई स्कूल के छात्रों को विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं को एक नारा लगाने के बाद कांग्रेसका विरोध करने के बाद तुरंत जेल मिलती थी मैंने भी काटी है जेल दो ढाई साल मामूली नहीं लखनऊ जेल में एक बैरक थी 11 बीसी जहां पर काग्रेस का विरोध करने के तुरंत बाद पुलिस उठाकर बंद कर देती है बहुत दिन काटे लेकिन उस बैरक के चारों ओर फांसी गारद और सारी कुख्यात कैदियों की बैरक बनी हुई थी जिसको चक्कर कहते थे मुझे ठीक से याद है चक्कर बाली सैलो में वह कुख्यात अपराधी रखे जाते थे जो जगन कांडों से संबंधित होते हैं और ठीक बीच में हम लोग राजनीतिक बंदी बंद किए जाते थे लिहाजा हम लोग आपस में एक दूसरे के ऐसे साथी हो जाते थे कि जैसे हम लोगों का जन्म जन्मांतर का रिश्ता हो फिर क्या था हम लोगों को सुपीरियर क्लास मिलता था हम लोगों की मिलाई अलग होती थी हम लोगों को उच्च स्तर का खाना मिलता है बी क्लास दिया जाता है लेकिन जनरल क्लास के कैदियों को हम लोगों के साथ काम के लिए लगा दिया जाता था वह हम लोगों की सेवा करते हैं हमारा ख्याल है यह प्रदेश भर में होता होगा और वहीं पर शुरू हो गया अपराधी और राजनीतिज्ञों का गठजोड़ ऐसा गठजोड़ जो आगे चलकर राजनीति के लिए काल बन गया जो अपराधी कल तक राजनीतिज्ञों के चरण लिया करते थे सन 1980 के बाद तक वह स्वयं राजनीति करने लगे जो कि जेल में नेताओं से निकटतम संबंध हो चुके थे वह बाहर भी कायम रहे वैसे तो कांग्रेसका एक सीधा सिद्धांता जो उनके साथ है चाहे वह अपराधी हो या नेता वह उनका है अगर उसने विरोध किया या तो जेल गया या फिर मुठभेड़ में ऊपर गया या ऐसे ही मार दिया गया उस समय मानव अधिकार या कोई जांच-पड़ताल तो होती नहीं थी की पुलिस वालों को किसी तरह का दंड मिल सके जैसा कि आज है आज बहुत सख्त है लेकिन खूबी की बात यह है उस समय जनसंख्या कम थी अपराधी कौन थे अपराध संभालना बहुत बड़ा काम नहीं होता था लेकिन आज जनसंख्या बहुत है अपराधी बहुत है फिर भी योगी आदित्यनाथ जैसे लोग अपराध पर काबू पाए हुए हैं यह भाजपा का गणित है वरना तो यह प्रदेश तबाह हो जाता है प्रदेश और देश को अपराधियों के हवाले करने और अपराधियों को नेता बनाने का पूरा काम जेल से हुआ उस समय यह फर्क ही नहीं किया जाता था कौन राजनीतिक कैदी है और कौन अपराधी है दोनों को एक साथ जेल में ठूंस दिया जाता था क्योंकि उस समय आंदोलन के नाम पर सपा बहुत ज्यादा जेल जाया करती थी और इसी कारण था कि मुलायम सिंह की पार्टी में जेल ही जेल की वजह से अपराधियों की भरमार हो गई अपराधी और उनके साथी भी वोट रखते हैं उसको मुलायम सिंह ने खूब पहचाना और नित्य प्रति आंदोलन में जेल जाने वाले यह समाजवादी पार्टी के लोगों ने जेल के भीतर अपराधियों से खूब दोस्ती कर ली और बाहर उसका सिलसिला चलता रहा यही कारण है कि कांग्रेस और सपा में सबसे अधिक अपराधी शामिल है सपा और कांग्रेस ने उन लोगों को उच्च स्तर में पहुंचाने का काम किया उनको टिकट दिए उनको चुनाव लड़ाया और लड़ाते भी क्यों नहीं अपराधियों ने समझ लिया था इन नेताओं को वह क्यों सपोर्ट करें जबकि वह खुद भी नेतागिरी कर सकते हैं चुनाव जीत सकते हैं 80 और 90 के बीच का हाल यही रहा कांग्रेश मुठभेड़ के नाम पर विरोधियों को खत्म करने की कोशिश करती रही लेकिन अपराधी अपने बचाव के लिए चुनाव के मैदान में आने लगे और जीतने लगे और यही 80 90 के बीच से शुरू हो गया राजनीत में अपराधियों का आना और चुनाव जीतना इस पूरे कार्यक्रम में काम शुरू हुआ जेल से और भुगतान किया जनता ने बाहर इस हकीकत की और जानकारी विस्तार से दूंगा क्योंकि मैं स्वयं कांग्रेश के विरोध में प्रदर्शन और धरना करते हुए जेल लगभग जो ढाई साल रहा एक भी मुकदमा अपराधिक में ही था लेकिन फिर भी वही सारे कुख्यात अपराधियों से दोस्ती हो गई बाहर जब हम को अपराध संवादाता का काम अखबार स्वतंत्र भारत में मिला तो मुझे पूरी जानकारी हो चुकी थी तब तक अपराध जगत की इसीलिए मैं सफल रहा और मैंने जो अपराधियों की दास्तान ए अखबार में लिखी वह कोई भी रिपोर्टर नहीं लिख सकता था क्योंकि वह इतना जेल नहीं रहा होगा और ना ही इतना कुख्यात अपराधियों के बीच में रहा होगा जारी रहेगा मेरा यह लेखन आप पढ़ना शुरू करें आपको बहुत आनंद आएगा धन्यवाद आरडी शुक्ला