रिपोर्टिंग के पहले दिन का शूटआउट कलेजा कांप उठा खून देखकर
July 25, 2019 • UPMA SHUKLA
  • मैं आरडी शुक्ला को जब पहले दिन क्राइम रिपोर्टिंग के लिए भेजा गया तो पुलिस के शूटआउट मैं दो बदमाशों के पुलिस सूट आउट पर मारे जाने पर खून देखकर कलेजा कांप उठा था मेरा दोस्तों यह बात में सन 1982 की बता रहा हूं जब मैंने स्वतंत्र भारत अखबार ज्वाइन किया और 1 साल पूरी ट्रेनिंग की तो अचानक एक दिन वहां जब मैं ड्यूटी पर पहुंचा तो पता चला की अखबार के संपादक बदल गए हैं और जो संपादक बनाए गए उनका नाम था वीरेंद्र सिंह बहुत ही सख्त बहुत ही तेज बहुत ही काबिल व्यक्ति थे मैं तो उनके कमरे के सामने से जाने से भी डरता था बहुत घबराता था क्योंकि सुनता था बहुत ही काबिल व्यक्ति हैं और सख्त है जिस दिन वह संपादक नियुक्त हुए मैं कार्यालय पहुंचा बहुत घबरा गया था कि अभी उनके साथ काम करना बहुत खतरनाक होगा उन दिनों में ट्रेनिंग कर रहा था और डेक्स पर काम कर रहा था मैं रिपोर्टर नहीं था जिस दिन वह संपादक बने उनको पूरे प्रेस के लोग और बाहर के लोग बधाइयां दे रहे थे मैं भी उनको बधाई देने पहुंचा था घबराते हुए उन्होंने मुझसे सिर्फ इतना कहा कि अभी थोड़ी देर में तो मिलना जरा बाहर घूमने चलेंगे मेरा प्रेस विधानसभा रोड पर था जहां आज रतन स्क्वायर है उनकी इस बात को सुनकर मुझे बेचैनी हुई कि पता नहीं क्या बात है अब पता नहीं हमको क्या करना पड़े कौन सा काम मिले या फिर हम को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए कोई बात तो जरूर है काफी देर के बाद जब भी सब की बधाइयां स्वीकार करके बाहर निकले दोनों ने हमको अपने साथ चलने के लिए कहा साथ में उनके वरिष्ठ पत्रकार और अपराध संवाददाता स्वर्गीय ताहिर अब्बास जी भी थे हम लोग उधर से बर्लिंगटन होटल हुसैनगंज चौराहे के पास पहुंचे वहां उन्होंने हमको होटल में बैठा ला चाय बगैरा मंगाई और हमसे बोले कि देखो आज मैं पहली बार तुमसे बात कर रहा हूं जब से तुम स्वतंत्र भारत में आए हो इसलिए कि अब हम को तुम से काम लेना है तुम और किसी विभाग में या और कार्य नहीं कर सकते हो तुम केवल अपराध संवाददाता का ही काम कर सकते हो यानी कि उनका कहना था कि मैं क्राइम रिपोर्टिंग ही अखबार में करने लायक हूं उन्होंने आगे कहा कि देखो तुमको लखनऊ के अपराधिक इतिहास का पूरा ज्ञान है विश्वविद्यालय में रहे हो इस जगत में भी तुम अपराध की दुनिया के जानकार की हैसियत से जाने जाते हो और मैं चाहता हूं कि कल से तुम क्राइम रिपोर्टिंग का काम स्वतंत्र भारत में संभालो मैं आश्चर्य में पड़ गया मेरे सामने वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर ताहिर अब्बास जी बैठे हुए थे वह वीरेंद्र सिंह जी के बहुत ही करीबी थे मुझे आश्चर्य हुआ कि यह जो काम ताहिर जी कर रहे हैं वह मुझे सौंप दिया गया खैर मैंने किसी तरह घबराते हुए चाय पी और फिर उनके साथ वापस प्रेस आया मैं अंदर से बहुत खुश था क्योंकि अचानक हुए इतने बड़े बदलाव मैं मुझको अपनी पसंद का काम मिल गया क्योंकि मैं चाहता था रिपोर्टिंग और वह काम मुझे मेरे संपादक स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह जी ने दे दिया मैं बहुत खुश हूं कर घर पहुंचा सबको मैंने खबर की कि आप कल से मैं एक बड़े अखबार में रिपोर्टर बन गया हूं और मैं क्राइम रिपोर्टिंग देखूंगा शाम को मैंने खूब जश्न भी मनाया खूब मौज मस्ती की क्योंकि मेरे मन की मुराद पूरी हुई थी पूरे डेढ़ 2 साल से मैं इसी दिन का इंतजार कर रहा था दूसरे दिन सवेरे सवेरे तैयार होकर पूजा पाठ करके प्रेस के लिए निकल पड़ा ठीक 10:00 बजे आज के रतन स्क्वायर पहले के पायनियर स्वच्छ भारत कार्यालय विधान सभा मार्ग पर पहुंच गया मैं वहां गेट पर पहुंचा ही था कि हमको वहां भीड़ दिखाई दी और हमारे कर्मचारी खड़े थे सब ने रोक लिया सब बोले आप अंदर कहां जा रहे हैं हमने कहा हमारी मीटिंग है अब मैं रिपोर्टर हो गया हूं तो सबने एक स्वर में कहा कि आप रिपोर्टर हो गए हैं तो आप हुसैनगंज आइए जहां आज दो बदमाशों का एनकाउंटर हो गया है हमारे कार्यालय से वह जगह हुसैनगंज की दिखाई दे रही थी जहां काफी भीड़  अप पुलिस अप पुलिस की गाड़ियां दिखाई दे रही थी मेरे रिपोर्टिंग का यह पहला दिन था मैं घबरा गया और कुछ भी हुआ और हुसैनगंज की ओर चल दिया वहां राज होटल के पास पहुंचा पता किया कि कहां पर मुठभेड़ हुई है तो पता चला पीछे गली में रात को पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए हैं उनकी लाशें वहां पड़ी है तो मैंने जानना चाहा कि अधिकारी या पुलिस के लोग कहां है राज होटल में बैठे हैं और घटनास्थल गली में है मैं पहले गली में अंदर पहुंचा तुमको वहां उपस्थित पुलिस वाले पहले एक घर की छत पर ले गए यहां एक बदमाश का शव पड़ा हुआ था गोलियों से छलनी था उसका नाम पुलिस ने पापे बताया फिर वहां से एक नीचे गली में एक दूसरे बदमाश की लाश को दिखाया वह भी गोलियों से छलनी था उसका नाम मुस्तफा बताया और बताया यह दोनों बदमाश चौक क्षेत्र में आतंक मचाए हुए थे कल रात 2:00 बजे के बाद उनके यहां होने की खबर मिली चौक पुलिस में कोतवाल दीनानाथ दुबे दरोगा शांति स्वरूप शुक्ला और एसके मिश्रा मैं उनको पुलिस फोर्स के साथ यहां गिरा उनसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा हुए गोली चलाने लगे इस पर पुलिस ने भी गोली चलाई जिसमें यह दोनों बदमाश मारे गए एक में छत से कूदकर भागने की कोशिश की जिससे वह गोली लगने से नीचे गिर गया क्योंकि मेरा पहला दिन था मैं कुछ नहीं जानता था यह सब क्या माजरा है फिर मैंने कहा अधिकारी कहां बैठे हैं पता चला सब राज होटल में बैठे हैं हुसैनगंज चौराहे पर ही राज होटल है मैं वहां पहुंचा पहला दिन था रिपोर्टिंग का अकड़ दिखाते हुए मैंने उन लोगों से पूछा पुलिस वालों से और कोतवाल दीनानाथ दुबे से यह सब क्या हुआ उन्होंने भी  यही बताया कि इन लोगों ने जो क्षेत्र में आतंक मचा रखा था बदमाशों की कई मामलों में तलाश थी कल रात हम लोगों को खबर लगी कि वह हुसैनगंज के इन मकानों में छिपे हुए हैं हम लोगों ने यहां छापा मारा चोर कोतवाल दीनानाथ दुबे के नेतृत्व में लखा चौकी इंचार्ज एसके मिश्रा और पाटा नाला चौकी इंचार्ज शांति स्वरूप शुक्ला मैं मैं फोर्स के लोगों यहां  जेगा दोनों ओर से गोलियां चली पापे मुस्तफा मारे गए अब इसके आगे वहां छानबीन  करने की कोई गुंजाइश हमको नहीं मिली मैं उस दिन बिल्कुल कुछ जानता भी नहीं था मुठभेड़ का मतलब या उसमें किस तरह से हमको रिपोर्टिंग करनी है क्या जानकारी लेनी है जो भी हमको बातें पता चली उसको लेकर मैं प्रेस गया और अपने वरिष्ठ ताहिर अब्बास जी से मदद ली ऑल जो खबर बना सका बनाकर मैंने अखबार को दे दिया फोटो खींची जा चुकी थी यह मेरा पहला दिन रिपोर्टिंग का था जो मैंने खून से सना हुआ पहला दिन देखा बाद में हमने प्रदेशभर में हुए मुठभेड़ों का घटनास्थल पर जा जा कर अध्ययन किया उसमें से कितने फर्जी थे उनको भी मैंने खोला यहां तक कई एक में पुलिस वालों को फांसी की सजा तक हुई बड़ी संख्या में पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ों की थी या यूं कहिए की हत्याएं की थी मैंने कई कई दिन जंगलों में भूखे प्यासे रहकर छानबीन की और सही नतीजे निकाले पहले मानव अधिकार या पुलिस के ऊपर कोई अंकुश नहीं था वह जिसको चाहती थी पकड़ कर मार देती थी और अजीब अजीब तरह की कहानियां बनाती थी झूठी मैंने खोला है कल से मैं एक एक करके आपको उन कहानियों को सुनाऊंगा आज के समय में एक भी मुठभेड़ करना फर्जी असंभव है लेकिन उस समय कई 1 मुठभेड़ों में तो मैं सामने रहा हूं जो पुलिस जान भी नहीं सकी कल से सुनिए हमारी जवानी पेड़ों की फर्जी कहानियां