संपादक के घर में चोरी दो कैसेट फिल्मी गानों के बरामद कराने के लिए एक हफ्ते खुद पुलिस के साथ दबिश दी एक ट्रक सामान बरामद हुआ तब कहीं जाकर मिला उनका गाने का कैसेट
August 21, 2019 • UPMA SHUKLA

आरडी शुक्ला द्वारा यह बात उस समय की है जब मैंने क्राइम रिपोर्टिंग शुरू की तो हमारे संपादक थे स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह जी उनको पढ़ने और गाना सुनने का शौक था बाकी उनको कोई मतलब नहीं हुआ करता था एक दिन उनके घर की खिड़की तोड़कर चोर घुसे पेपर मिल कॉलोनी में जो महानगर थाने के अंतर्गत आती है चोरों को अंदर किताबों के अलावा कुछ दिखाई नहीं दिया वहां सिर्फ कुछ कैसेट रखे हुए थे उस समय कैसेट भी काफी कीमती समझे जाते थे कैसेट चोर उठा ले गए संपादक जी ने हमसे कहा कि उनको कोई सामान नहीं चाहिए उनका जो अंग्रेजी के दो गानों के कैसे रहें वह किसी भी हालत में मिलने चाहिए अब आप सोचें कि समान तो उनका कुछ थोड़ा बहुत और भी गया था लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें कैसेट हर हालत में चाहिए उन्होंने विदेश से मंगाए थे और उनके बहुत ही चहेते कैसेट वे रोज सुनते थे उनको अब यह चैलेंज का मामला था वह कैसे यहां लखनऊ में मिलने नहीं थे वरना ले आते और उनको दे देते अब महानगर पुलिस और मैं दोनों सकते में थे कि कैसे क्या किया जाए संपादक नाराज थे हमने का किसी भी हालत में कैसेट चाहिए पहले की पुलिस थी फिर वह लग गई और हम लोग लग गए कि उस क्षेत्र में कौन कौन चोर है किसने चोरी की है आखिर में देखिए यह मालूम हो गया कि मंगल चोर है जो चिनहट से लेकर महमूदाबाद देवा और उस क्षेत्र तक रहता है और इधर शहर से चोरी करके अपने इलाके में घुस जाता है जाकर एक महीना हो रहा था मंगल चोर हाथ में लग रहा था चिनहट से देवा के आगे तक करीब 50 गांव में हम लोग छापे मार चुके थे और हर बार जिस घर में जाते वहां सामान तो मिलता लेकिन मंगल नहीं मिलता मंगल चोर नहीं मिलता और ना ही कैसेट वहां तो महिलाओं के समान मिलते थे मंगल चोर की एक खासियत थी कि वह महिलाओं के लिए भी चोरी करता था उस उधर देहात में उसकी इतनी महिला प्रेमिका ए थी कि वह उनके लिए शहर से चोरी करके समान ले जाता था साड़ियां कपड़े और उनको बांटता था आप यकीन नहीं मानेंगे की चिनहट से महमूदाबाद देवा के लगभग 50 गांव में हम लोगों ने छापे मारे और एक ट्रक समान बरामद किया लेकिन कैसेट नहीं मिला क्योंकि मंगल चोर हाथ नहीं लगा आखिर में एक रात सटीक मुखबिरी पर देवा के एक गांव में जब पुलिस और हम लोगों ने छापा मारा तो रात करीब 2:00 बजे मंगल एक घर के पीछे तालाब था वह कूदा उसमें पैर के भागने लगा रात का करीब 2:00 बज रहा था पुलिस और हम लोगों ने उसे घेर रखा था इत्तेफाक की बात थी कि मेरे कंधे पर राइफल थी मैं उसको लिए हुए कूद गया और उसको जाकर पकड़ा पकड़ कर बाहर जाए पानी से मैं राइफल के मैं पानी मैं कूद गया था जाड़े की रात थी जैकेट भी पहना था सब भी गया था वहीं पर गांव में आग जलवा कर जब खूब तापा तब जाकर कहीं हमारे होश ठिकाने आए काफी पुलिस थी साथ में मंगल को पकड़ा और उसको जब लेकर लखनऊ आए आते आते पुलिस की 2 गाड़ियां चोरी के सामान से भर गई थी लखनऊ आकर जब उसको एक रात टाइट किया गया तब उसने एक महिला के घर से दोनों कैसेट बरामद करवाएं मंगल की एक खासियत थी क्यों जिस घर में भी रुकता था वहां की महिलाओं के लिए वह काफी सामान लखनऊ से चोरी करके ले जा कर देता था संपादक जी के दो कैसेट बरामद करवाने में लगभग 100 से ऊपर चोरियों का माल मिल गया और लगातार एक महीने तक हम लोग दबिश देते रहे जब संपादक जी को हमने कैसेट दिया तब उन्होंने कहा नहीं तुम वाकई क्राइम रिपोर्टर हो हमें उम्मीद नहीं थी कि यह कैसे वापस मिलेंगे यह हमारे लिए बहुत कीमती थे घर हमारी नौकरी बची लेकिन जितनी मेहनत उनको कैसेट को बरामद करने में पुलिस ने की उससे यह तो हो गया कि सैकड़ों चोरियों का माल उस मंगल चौक से लोगों को वापस मिल गया थाने पर आ गए लोग पुलिस की बहुत तारीफ कर रहे थे मैं मन में सोचता था कि अगर संपादक जी के कैसेट चोरी ना हुए होते तो इन विचारों का हिस्सा मान कभी जिंदगी में नहीं मिलता