1990 में राम मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा करवाने के लिए मुलायम सिंह से युद्ध लेने वाला एकमात्र अखबार स्वतंत्र भारत ही था लेकिन आज उसके हजारों पत्रकार और गैर गैर पत्रकार कर्मचारी जवानी में विधवा हो गए या तो तमाम लोग भूखों मर गए या मर रहे हैं उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है ना सरकार न पत्रकार आरडी शुक्ला की कलम से
August 14, 2020 • UPMA SHUKLA

अजीब विडंबना है कि वास्तव में जो भी सच्चे मन से और विश्वास से भगवा न 

 

का

काम करता है उसको भगवान के अलावा उसका ध्यान और कोई नहीं रखता आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने और भूमि पूजन मोदी और योगी जी द्वारा किया जाना उन तमाम दिलों के अंदर एक ऐसी खुशी लेकर आया जिसका अंदाजा किसी को नहीं है वह खुशी जो हम लोगों के अंतरात्मा में सv उई यूंमा गई है आपको बताना चाहता हूं इस सन 1990 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे उस समय मैं प्रदेश ही नहीं देश के माने जाने लाखों लाख बिकने वाले अखबार स्वतंत्र भारत में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत था उस समय उस अखबार से ज्यादा कोई अखबार प्रदेश नहीं देश में नहीं बिकता था और जनता उसे अपार सहयोग करती थी उस अखबार के मस्तक पर कृष्ण जी का फोटो था स्वतंत्र भारत अखबार अंग्रेजों के द पायनियर अखबार का हिंदी संस्करण था इसका प्रकाशन आजादी की रात से शुरू हुआ था धीरे धीरे इसमें लोग जुड़ते गए और यह आपातकाल के बाद प्रदेश का नंबर वन अखबार हो गया सन 80 के दशक में इसने अपार पाठक बनाए उस समय इस अखबार को मारवाड़ी सेठ जयपुरिया चलाया करते थे और ठीक उसी समय 1989 90 के दौरान इस अखबार को जयपुरिया मैं था पर ग्रुप को बेच डाला  उस समय हमारे संपादक स्वर्गीय पूर्व सांसद राजनाथ सिंह जी थे वह राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत से जुड़े हुए थे फैजाबाद के रहने वाले थे और सन 1950 से ही उनका परिवार r.s.s. से जुड़ा था और राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ा था बहुत करीब से यह इत्तेफाक था आंदोलन का सबसे कठिन दौर उस समय शुरू हुआ 1990 में जब मुलायम सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अयोध्या में कार सेवा की शुरुआत की घोषणा की गई राजनाथ सिंह जी स्वतंत्र भारत के संपादक थे उन्होंने हम सबको जोड़ कर एक ऐसी टीम बनाई जो अखबार के जरिए कार सेवा के इस आंदोलन में पूरी तरह जुट गई उन दिनों सोशल मीडिया था ना इलेक्ट्रॉनिक मीडिया था केवल दूरदर्शन आया करता था उसमें राम मंदिर का कोई समाचार नहीं दिया जाता था लेकिन हमारा स्वतंत्र भारत अखबार चार मशीनों पर छपता था लाखों लाख पाठकों के बीच में पहुंचकर करोड़ों लोगों को खबर पढ़ाता था वही एकमात्र ऐसा अखबार था जो कुछ भी वह लिखता था उसकी सच्चाई पर जनता विश्वास करती थी राजनाथ सिंह जी मैं कार सेवा की खबरों को प्रमुखता से छापना शुरू किया अब क्यों ना करते उस समय जनता की अपार मांग थी स्वतंत्र भारत में कार सेवा की खबरों को बहुत प्राथमिकता से छपने लगी अखबार बहुत ऊपर उठने लगा धीरे धीरे अखबार ने मंदिर आंदोलन का पूरा नेतृत्व ही संभाल लिया मीडिया में उस समय लखनऊ से प्रकाशित होने वाले दैनिक जागरण जो कि दूसरे स्थान पर था उसके स्थानीय संपादक स्वर्गीय विनोद शुक्ला जी उसके संपादक स्वर्गीय नरेंद्र मोहन जी और अमर उजाला के डोरीलाल जी आज अखबार के संपादक राजेंद्र द्विवेदी जी  हमारे संपादक स्वर्गीय राजनाथ सिंह जी के साथ आ गए और सभी लोग इस राम मंदिर निर्माण के लिए किए जाने वाले कार्य सेवा में सम्मिलित हो गए और ख़बरें पक्ष में छपने लगे लेकिन इन सब का नेतृत्व राजनाथ सिंह ही कर रहे थे उनका नेतृत्व इतना कुशल था कि मुलायम सिंह उस से घबरा गए कारसेवकों की भीड़ अयोध्या में इन अखबारों के द्वारा बढ़ाई जाती रही धीरे-धीरे हालत यह हो गई मुलायम सिंह इन अखबारों के कारनामों से इतना ज्यादा तिलमिला गए योगेश सीधे अखबार के दफ्तरों में हमले करने लगे यही नहीं 1 दिन लखनऊ के जिलाधिकारी स्वर्गीय प्रियदर्शी जी पीएसी के साथ विधान सभा मार्ग स्थित द पायनियर और स्वतंत्र भारत अखबार के भीतर घुसकर लाठियां बरसाने लगे अखबार की बिजली काट दी गई प्रबंधक संपादक सब पर मुकदमे कायम हो गए यह सब मुलायम सिंह के राज में हो रहा था लेकिन फिर भी राम मंदिर के लिए अटल राजनाथ सिंह ने हार नहीं मानी जनरेटर चलाकर अखबार के दफ्तर को अंधेरा करके अखबार छपते रहे और स्वयं अयोध्या में अपने दैनिक जागरण के साथी विनोद शुक्ला राजेंद्र द्विवेदी जी और सैकड़ों अन्य साथियों के साथ डेरा जमा लिया यही नहीं 30 अक्टूबर को 1990 में कार सेवा करने के लिए सबसे पहले जन्मभूमि पर पहुंच गए सभी पत्रकारों ने राजनाथ सिंह के नेतृत्व में कार सेवा की जहां तक मुझे ध्यान है यह लोग वहीं पर मामूली कारसेवकों की तरह कार सेवा भी की इन लोगों के इस कार्य से नाराज होकर मुलायम सिंह ने आम कारसेवकों के साथ साथ इन लोगों को भी अयोध्या में कैद करके रखा लेकिन फिर भी वहां से खबरें आती गई कारसेवक बढ़ते गए सरकार ने तो अयोध्या मैं परिंदे को न घुसने देने की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की थी जमके शक्ति की गई थी 30 अक्टूबर को 2 कारसेवकों को गोली भी मार दी गई थी उसकी फोटो छपी थी उसके बाद मुलायम सिंह अति में नाराज हो गए उस समय वहां कप्तान थे सुभाष जोशी मुलायम सिंह ने उनको किसी भी हद तक जाने के लिए छूट दे रखी थी जमके पुलिस की ऐसी लगाई गई थी लेकिन हम लोगों का अखबार लगातार मुलायम सिंह के खिलाफ और मंदिर के पक्ष में खास तौर पर कार सेवा के पक्ष मे खूब खबरें छाप रहा था जितना स्वतंत्र भारत में और अखबारों में कार सेवा के पक्ष में छप रहा था उतना ही मुलायम सिंह गर्म होते जा रहे थे यही नहीं व्यक्तिगत तौर पर भी राजनाथ सिंह और अन्य संपादकों से उनकी नोकझोंक भी हो रही थी क्योंकि मैं अखबार में था काम कर रहा था इसलिए मुझे पूरी जानकारी है राजनाथ सिंह हिम्मत तोड़ने वाले पत्रकार नहीं थे वह मुलायम सिंह की धमकियो और उनके द्वारा की जाने वाली गुजारिशा को ठुकराते गए वह पक्के ठाकुर थे नहीं टूटे और उनसे भिड़ गए

अजीब विडंबना है कि वास्तव में जो भी सच्चे मन से और विश्वास से भगवा न 

 

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काम करता है उसको भगवान के अलावा उसका ध्यान और कोई नहीं रखता आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने और भूमि पूजन मोदी और योगी जी द्वारा किया जाना उन तमाम दिलों के अंदर एक ऐसी खुशी लेकर आया जिसका अंदाजा किसी को नहीं है वह खुशी जो हम लोगों के अंतरात्मा में सv उई यूंमा गई है आपको बताना चाहता हूं इस सन 1990 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे उस समय मैं प्रदेश ही नहीं देश के माने जाने लाखों लाख बिकने वाले अखबार स्वतंत्र भारत में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत था उस समय उस अखबार से ज्यादा कोई अखबार प्रदेश नहीं देश में नहीं बिकता था और जनता उसे अपार सहयोग करती थी उस अखबार के मस्तक पर कृष्ण जी का फोटो था स्वतंत्र भारत अखबार अंग्रेजों के द पायनियर अखबार का हिंदी संस्करण था इसका प्रकाशन आजादी की रात से शुरू हुआ था धीरे धीरे इसमें लोग जुड़ते गए और यह आपातकाल के बाद प्रदेश का नंबर वन अखबार हो गया सन 80 के दशक में इसने अपार पाठक बनाए उस समय इस अखबार को मारवाड़ी सेठ जयपुरिया चलाया करते थे और ठीक उसी समय 1989 90 के दौरान इस अखबार को जयपुरिया मैं था पर ग्रुप को बेच डाला  उस समय हमारे संपादक स्वर्गीय पूर्व सांसद राजनाथ सिंह जी थे वह राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत से जुड़े हुए थे फैजाबाद के रहने वाले थे और सन 1950 से ही उनका परिवार r.s.s. से जुड़ा था और राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ा था बहुत करीब से यह इत्तेफाक था आंदोलन का सबसे कठिन दौर उस समय शुरू हुआ 1990 में जब मुलायम सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अयोध्या में कार सेवा की शुरुआत की घोषणा की गई राजनाथ सिंह जी स्वतंत्र भारत के संपादक थे उन्होंने हम सबको जोड़ कर एक ऐसी टीम बनाई जो अखबार के जरिए कार सेवा के इस आंदोलन में पूरी तरह जुट गई उन दिनों सोशल मीडिया था ना इलेक्ट्रॉनिक मीडिया था केवल दूरदर्शन आया करता था उसमें राम मंदिर का कोई समाचार नहीं दिया जाता था लेकिन हमारा स्वतंत्र भारत अखबार चार मशीनों पर छपता था लाखों लाख पाठकों के बीच में पहुंचकर करोड़ों लोगों को खबर पढ़ाता था वही एकमात्र ऐसा अखबार था जो कुछ भी वह लिखता था उसकी सच्चाई पर जनता विश्वास करती थी राजनाथ सिंह जी मैं कार सेवा की खबरों को प्रमुखता से छापना शुरू किया अब क्यों ना करते उस समय जनता की अपार मांग थी स्वतंत्र भारत में कार सेवा की खबरों को बहुत प्राथमिकता से छपने लगी अखबार बहुत ऊपर उठने लगा धीरे धीरे अखबार ने मंदिर आंदोलन का पूरा नेतृत्व ही संभाल लिया मीडिया में उस समय लखनऊ से प्रकाशित होने वाले दैनिक जागरण जो कि दूसरे स्थान पर था उसके स्थानीय संपादक स्वर्गीय विनोद शुक्ला जी उसके संपादक स्वर्गीय नरेंद्र मोहन जी और अमर उजाला के डोरीलाल जी आज अखबार के संपादक राजेंद्र द्विवेदी जी  हमारे संपादक स्वर्गीय राजनाथ सिंह जी के साथ आ गए और सभी लोग इस राम मंदिर निर्माण के लिए किए जाने वाले कार्य सेवा में सम्मिलित हो गए और ख़बरें पक्ष में छपने लगे लेकिन इन सब का नेतृत्व राजनाथ सिंह ही कर रहे थे उनका नेतृत्व इतना कुशल था कि मुलायम सिंह उस से घबरा गए कारसेवकों की भीड़ अयोध्या में इन अखबारों के द्वारा बढ़ाई जाती रही धीरे-धीरे हालत यह हो गई मुलायम सिंह इन अखबारों के कारनामों से इतना ज्यादा तिलमिला गए योगेश सीधे अखबार के दफ्तरों में हमले करने लगे यही नहीं 1 दिन लखनऊ के जिलाधिकारी स्वर्गीय प्रियदर्शी जी पीएसी के साथ विधान सभा मार्ग स्थित द पायनियर और स्वतंत्र भारत अखबार के भीतर घुसकर लाठियां बरसाने लगे अखबार की बिजली काट दी गई प्रबंधक संपादक सब पर मुकदमे कायम हो गए यह सब मुलायम सिंह के राज में हो रहा था लेकिन फिर भी राम मंदिर के लिए अटल राजनाथ सिंह ने हार नहीं मानी जनरेटर चलाकर अखबार के दफ्तर को अंधेरा करके अखबार छपते रहे और स्वयं अयोध्या में अपने दैनिक जागरण के साथी विनोद शुक्ला राजेंद्र द्विवेदी जी और सैकड़ों अन्य साथियों के साथ डेरा जमा लिया यही नहीं 30 अक्टूबर को 1990 में कार सेवा करने के लिए सबसे पहले जन्मभूमि पर पहुंच गए सभी पत्रकारों ने राजनाथ सिंह के नेतृत्व में कार सेवा की जहां तक मुझे ध्यान है यह लोग वहीं पर मामूली कारसेवकों की तरह कार सेवा भी की इन लोगों के इस कार्य से नाराज होकर मुलायम सिंह ने आम कारसेवकों के साथ साथ इन लोगों को भी अयोध्या में कैद करके रखा लेकिन फिर भी वहां से खबरें आती गई कारसेवक बढ़ते गए सरकार ने तो अयोध्या मैं परिंदे को न घुसने देने की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की थी जमके शक्ति की गई थी 30 अक्टूबर को 2 कारसेवकों को गोली भी मार दी गई थी उसकी फोटो छपी थी उसके बाद मुलायम सिंह अति में नाराज हो गए उस समय वहां कप्तान थे सुभाष जोशी मुलायम सिंह ने उनको किसी भी हद तक जाने के लिए छूट दे रखी थी जमके पुलिस की ऐसी लगाई गई थी लेकिन हम लोगों का अखबार लगातार मुलायम सिंह के खिलाफ और मंदिर के पक्ष में खास तौर पर कार सेवा के पक्ष मे खूब खबरें छाप रहा था जितना स्वतंत्र भारत में और अखबारों में कार सेवा के पक्ष में छप रहा था उतना ही मुलायम सिंह गर्म होते जा रहे थे यही नहीं व्यक्तिगत तौर पर भी राजनाथ सिंह और अन्य संपादकों से उनकी नोकझोंक भी हो रही थी क्योंकि मैं अखबार में था काम कर रहा था इसलिए मुझे पूरी जानकारी है राजनाथ सिंह हिम्मत तोड़ने वाले पत्रकार नहीं थे वह मुलायम सिंह की धमकियो और उनके द्वारा की जाने वाली गुजारिशा को ठुकराते गए वह पक्के ठाकुर थे नहीं टूटे और उनसे भिड़ गए 

अब अभी हमारा ये लेख जारी रहेगा कृपया पढ़ते रहिए क्रमशह