राजनीति का अपराधीकरण शुरू हुआ जेल से
July 7, 2020 • UPMA SHUKLA

 ऑडी शुक्ला द्वारा आज हम आपको वह सच्चाई बताने जा रहे हैं जहां से अपराधियों ने नेताओं का साथ किया और पहले अपराधी नेताओं का समर्थन करते रहे और फिर स्वयं को सक्षम समझकर नेताओं को किनारे कर स्वयं चुनाव मैदान में आकर राजनीति के गलियारे तक पहुंच गए यह सब कहानी मुझको जहां तक याद  आता है किशन 1975 ऐसा वर्ष था कि जब कांग्रेस सरकार के खिलाफ विपक्ष के लोग लगातार मुद्दा पकड़ पकड़ कर सड़क पर आंदोलन करते हुए क्योंकि उस समय कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार हुआ  करती थी और उसके खिलाफ आंदोलन करने वाले भाजपा सहित तमाम छोटे छोटे दल के अलावा छात्र और विभिन्न मजदूरों के संगठन लगातार आंदोलन चलाते रहते थे सरकार इन आंदोलनकारियों के दमन के   लिए गिरफ्तार कर छोटी मोटी धाराओं में जेल भेज   देती थी उस समय कोई जेल ऐसी नहीं बनी थी किस देश में राजनीतिक बंदियों और सामान्य कैदियों को बैरक में अलग रखा जा सके सो आंदोलनकारी छात्र युवा राजनीतिज्ञ मजदूर सब को एक समान समान कैदियों की भाजी उन्हीं के बैरक में बंद कर दिया जाता था वहां पर राजनीतिक कैदियों को एक सुविधा   यह  मिल जाती थी कि वह समान कैदियों से ऊपर होते थे उनको उच्च स्तर का भोजन मिलता  था और ज्यादा   शक्ति नहीं होती थी जिसका फायदा उठाकर राजनीतिक बंदी पूरी जेल में घूमते थे आराम से और सभी कैदियों से मिलते जुलते थे वहीं पर धीरे धीरे नेताओं और अपराधियों के बीच में दोस्ती शुरू हो गई सन 1980 तक बहुत जबरदस्त आंदोलन हुए बड़ी संख्या में नेता युवा छात्र मजदूर संगठन के लोग जेलों में गए और काफी काफी दिन रहे इसके चलते अपराधियों और नेताओं के बीच ऐसी सांठगांठ हुई जो आगे चलकर पहले तो नेताओं के पीछे चल कर इन नेताओं ने खुले मैदान में अपनी पैठ बनाई फिर धीरे-धीरे सन 1985 और 90 तक वे स्वयं मैदान में कूद पड़े वह दौर ऐसा था बड़े से बड़े नेता को जेल जाना पड़ता था वहीं से उसकी नेतागिरी शुरू होती है इस दौरान अपराधियों ने नेताओं के सारे गुण सीख लिए थे और उसके बाद जब वह छूट छूट कर बाहर आए भले ही वह आपराधिक मामलों में जेल रह चुके थे संगीन अपराधों में जाते थे और यह नेता मामूली धाराओं में धीरे-धीरे यह गठबंधन बाहर चुनाव के मैदान में दिखने लगा यही नहीं जेल की बनी दोस्ती इस कदर पक्की होती  गई कि बाहर चुनाव के मैदान में नेता और अपराधी गले में हाथ डाल कर दिखाई देने लगे चुनाव में अपराधियों का बड़ा रोल होने लगा पहले तो अपराधी चुनाव मैदान में नेताजी को विधायक एमपी बनाने में लग जाते थे फिर नेता चुनाव जीतने के बाद अपराधियों की मदद करते थे लेकिन धीरे-धीरे 1990 तक हालत यह हो गई अपराधियों ने जब यह देखा उनकी मदद से देश की संसद में और प्रदेश की विधानसभा में लोग पहुंच रहे हैं तो उन लोगों ने बजाएं नेताओं के सपोर्ट करने के स्वयं ही राजनीति करने की ठान ली और अपना दल बल बनाकर  स्वयं चुनाव लड़ने लगे और जीतने लगे धीरे धीरे हालत यह हो गई  हर पार्टी ने अपराधियों को टिकट देना शुरू कर दिया और पार्टियों में  एक ओर से शुरु हो गई किस पार्टी के  पास कितने शातिर बदमाश ह इससे दल की हैसियत  पता चलने लगी लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे ठीक-ठाक लोग पढ़े-लिखे लोग राजनीति से अलग होते गए अपराधी माफिया ठेकेदार जमीन के दलाल  और कल तक लूट पाठ करने वाले लोग राजनीति में आने लगे इन लोगों ने राजनीति में आकर जनता को लूटना तो शुरू ही किया साथ में सरकार में रहकर वहां भी घोटाले करने लगे और पैसा कमाने लगे यहां पहले बिना पैसे के चुनाव लोग लड़ लिया करते थे और ईमानदार लोग साफ छवि वाले लोग चुनाव जीते थे वही इन अपराधियों के सत्ता तक पहुंचने के बाद राजनीति के हालात बदल गए यह अपराधी मंत्री भी बनने लगे उसके बाद तो जो हालत हुई है वह आप सबके सामने आज सत्ता में भाजपा का रहना इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि आजादी के बाद से भारतीय जनता पार्टी पूर्व की जनसंघ कभी सत्ता में नहीं रहे इस कारण उनके अंदर या अपराधिक गतिविधियां  बिल्कुल नहीं थी और ना ही यह दल अपराधियों को पसंद करता था सत्ता से बाहर रहने के कारण उनके पास अपराधियों को पालने का पैसा भी नहीं था कांग्रेश और क्षेत्रीय पार्टियां अपराधियों का खुलकर  उपयोग करती थी यहां तक की चुनाव के समय में अच्छा पैसा दे दे कर कॉन्ग्रेस इन अपराधियों को बूथ कैपचरिंग के लिए इस्तेमाल करती थी यही कारण था सबसे ज्यादा अपराधियों  की  पसंद कांग्रेस थी और उसकी सरकार    भी अधिक समय तक थी जब छोटे छोटे दलों की सरकार बनने लगी तो यह अपराधी उस में घुसकर टिकट प्राप्त करने लगे उनके साथ जेल के ऐसे रिश्ते थे कि उनको बड़ी आसानी से इन दलों ने स्वीकार कर लिया सन 2000 आने तक हालत ऐसी हो गई ईमानदार साफ-सुथरे लोग गरीब लोग राजनीत से गायब हो गए बाकी बचे ठेकेदार माफिया जैसे गलत लोग राजनीत में हावी हो गए जनता को जाति  के आधार पर बांट दिया गया उस समय तक भारतीय जनता पार्टी अपना वह स्थान नहीं बना पाई जो आज है आज जो स्थिति भारतीय जनता पार्टी की है इसी कारण हुई क्योंकि जनता को जब लगा कि राजनीत बहुत गड़बड़ आ गई है अपराधी पूरी तरह हावी हो चुके हैं वह क्या करें  तब तक भारतीय जनता पार्टी मंदिर आंदोलन के रूप में एक धार्मिक और स्वच्छ पार्टी के रूप में जनता के सामने आ गई 2010 तक जब जनता घोटालों घोटाले घोटाले बाजों से बहुत अधिक तंग हो गई अपराधियों से बुरी तरह गिर गई यहां तक की जनता के घर घाट जमीन संपत्ति सत्ता के बल पर अपराधी हड़पने लगे इन सब खेलो को देखकर जनता ने 2014 के बाद भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत दे दिया संसद में भी और उत्तर प्रदेश में भी वहां मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो यहां योगी जी मुख्यमंत्री बने और तब से आज तक अपराधियों की कहानी धीरे-धीरे बंद होना शुरू हुई यह कानपुर कांड होने से पहले प्रदेश में माफिया अपराधियों के खिलाफ जबरदस्त अभियान चल रहा था योगी जी ने धरपकड़ इन अपराधियों की काफी तेजी से चालू करवा रखी थी लेकिन अचानक दुनिया में फैली करो ना बीमारी के कारण दिल्ली की प्रदेश की सरकार जनता की जान बचाने के लिए डॉक्टरों नर्सों मेडिकल कर्मियों और पुलिस की सहायता    से जनता की जान बचाने में लग गए वरना अब तक अपराधियों  का खात्मा हो चुका होता इस मामले में या खुलकर कहा जा सकता है कि भाजपा की सरकार अपराधियोंं से किसी प्रकार का गठबंधन नहीं कर रही थी जनता बेहद खुश थी इस महामारी  और सीमा पर चीन की घुसपैठ के कारण कुछ समय के लिए दिल्ली और प्रदेश सरकार का ध्यान उधर चला गया इस बीच यह कांड हो गयावरना योगी जी के शासन में लगातार अपराधियों की और माफियाओं की कमर  टूटती जा रही थी और सरकार उनको जेल केेेेेे भीतर  या ऊपर भेज रही थी अचानक कानपुर में हुआ कांड इन परिस्थितियों का ही परिणाम है लेकिन हालात बहुत जल्दी सुधर जाएंगे आजादी के बाद सेपहली बार यह देखने को मिला है  कि किसी माफिया अपराधी का किला उसी के हथियाार से 24 घंटे के भीतर ध्वस्त कर दिया गयाघटना के मात्र 24 घंटे के भीतर इतना सख्त एक्शनआज तक किसी ने उठाने की हिम्मत नहीं  की यह तो मोदी जी और योगी जी के शासन का परिणाम है की माफिया और अपराधी के खिलाफ इतनाा सख्त एक्शन हुआबाकी तो आज तक इतना सख्त आज तक कोई उठा ही नहीं पाया